एक था रसल एक्सचेंज, आज भी है

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Image caption भारत का सबसे पुराना नीलामी घर है कोलकाता का रसल एक्सचेंज

कोलकाता एक समय अपने नीलामी घरों के कारण जाना जाता था. ब्रितानी हुकूमत के राजधानी दिल्ली ले जाने के साथ ही यह सारा कारोबार वहां चला गया.

हालांकि भारत का सबसे पुराना नीलामी घर रसल एक्सचेंज आज भी वहीं है और अपने इतिहास को बनाए हुए है. वैसे समय की मांग के अनुसार इसे भी कई बदलाव अपनाने पड़े हैं.

कभी कलाकारों, कारोबारियों और राजदूतों के बीच लोकप्रिय रहा रसल एक्सचेंज दो भाईयों अनवर और अरशद के लिए अपने पिता की विरासत को बनाए रखने की कवायद है.

गौरवपूर्ण इतिहास

इतिहास के पन्ने पलटने पर साफ दिखाई देगा कि एक समय रसल एक्सचेंज का रुतबा लंदन के सदबीज जैसे अंतरराष्ट्रीय नीलामी घरों के बराबर था. लोग दिल्ली़ और मुंबई से यात्रा कर अपना शाही फर्नीचर खरीदने और बेचने कोलकाता आते थे.

लेकिन आज रसल एक्सचेंज में पुरानी मोटर साइकिलों, इलेक्ट्रानिक्स सामान, क्रिस्टल शिडलरों, पुरानी सीडी से लेकर बर्मा टीक के लिए बोली गूंजती है.

बड़ा भाई अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा विदेश में बिताने के बाद हाल ही में कोलकाता लौटा है. अब उसका सपना रसल एक्सचेंज को उसी गौरव में ले जाना है जिसके बचपन में गवाह वह खुद रहे हैं.

दूसरी तरफ छोटे भाई अरशद ने जवानी में कदम रखने से पहले रसल एक्सचेंज की चौखट पार की थी. अरशद ने 18 साल की उम्र में रसल एक्सचेंज में पहली बार तीन बार लकड़ी की हथौड़ी ठोकी थी. उस समय भारत में इतनी छोटी उम्र में किसी ने कभी नीलामी नहीं की थी.

अरशद का दावा है कि वह पिन से लेकर हवाई जहाज भी बेच सकते हैं.

नई कोशिशें

रसल एक्सचेंज को बचाए रखने के लिए दोनों भाईयों ने अब कई उपाय किए हैं. बिल्डिंग के एक हिस्से की मरम्मत कर उसे सिर्फ दुर्लभ चीजों की बिक्री के लिए रखा गया है.

नीलामी की बोली के अलावा अब कभी-कभी शहर के फैशन डिजाइनर डेवर नील के चमक भरे कपड़े पहने मॉडलों की कैटवाक के बीच सैंकड़ों कैमरों के शटर के खट्क...खट्क... की आवाज भी रसल एक्सचेंज के अस्तित्व का हिस्सा है.

रसल एक्सचेंज की शामों को संगीतमय बनाने की भी योजना है.

वैसे इस सब से बतौर नीलामी घर रसल एक्सचेंज के इतिहास और अस्तित्व पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. खासकर इसमें काम करने वाले करीब दर्जन भर स्टाफ के लिए. इनमें से अधिकतर अपने दादा और पिता की नौकरी को ही आगे बढ़ा रहे हैं.

हालांकि आसपास लगातार बदल रहे माहौल के बीच अनवर और अरशद कोलकाता के इतिहास के इस हिस्से को कामयाबी से कितने समय और चला पाएंगे, यह एक यक्ष प्रशन है.

(एड ओवलेस ब्रितानी डाक्यूमेंटरी निर्माता हैं)

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