सुरजीत हमारे जासूस नहीं: गृह सचिव

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Image caption सुरजीत सिंह की फांसी की सज़ा 1989 में माफ़ कर दी गई थी

भारत सरकार ने पाकिस्तान की जेल से गुरुवार को रिहा हुए सुरजीत सिंह के इस दावे को गलत बताया है कि वे किसी सरकारी एजेंसी के जासूस थे.

शुक्रवार को एक पत्रकारवार्ता में केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा है, "हम इस तरह से किसी की जासूसी नहीं करते."

सुरजीत सिंह ने लाहौर जेल से रिहा होने के बाद वाघा बॉर्डर पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि वे पाकिस्तान में भारत की ओर से जासूसी करने गए थे.

बाद में उन्होंने कहा था कि वे भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आरएडब्यू) के लिए जासूसी कर रहे थे.

लेकिन गृहमंत्री पी चिदंबरम की मौजूदगी में गृहसचिव ने कहा, "हम इसका खंडन करते हैं."

उन्होंने कहा, "अक्सर लोग इस तरह के दावे इसलिए करते हैं क्योंकि वे अपने आपको महत्वपूर्ण साबित करना चाहते हैं."

उन्होंने कहा कि सुरजीत सिंह ने पाकिस्तान की जेल में दुर्वव्यहार की शिकायत की है, और वे इसे संज्ञान में लिया है.

लेकिन जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि लेकिन सुरजीत सिंह ने तो कहा है कि पाकिस्तान की जेल में उनसे अच्छा व्यवहार किया गया, तो गृह सचिव ने कहा, "अगर वो (सुरजीत सिंह) कह रहे हैं कि पाकिस्तान की जेल में उनसे अच्छा व्यवहार किया गया तो मैं ऐसे लोगों को ला सकता हूँ जो इसके विपरीत बातें कहें."

सुरजीत सिंह को तीन दशक से भी अधिक समय तक पाकिस्तान की जेलों में क़ैद रहे.

पहले उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में राष्ट्रपति ने इस सज़ा को माफ़ करके उम्रक़ैद में बदल दिया था.

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