कलाम ने ही रोका था सोनिया का रास्ता: स्वामी

सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption सोनिया गांधी ने 18 मई, 2004 को कलाम से मिलकर मनमोहन सिंह के नाम का प्रस्ताव किया था

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के इस दावे को चुनौती दी है कि अगर सोनिया गांधी चाहतीं तो उनके पास उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

उन्होंने कहा कि अब्दुल कलाम ने 17 मई, 2004 को जो चिट्ठी सोनिया गांधी को लिखी थी, उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि अब्दुल कलाम ने अपने आने वाली पुस्तक 'टर्निंग पॉइंट' में लिखा है कि 18 मई को जब सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुँचीं तो उनके नाम की चिट्ठी तैयार थी लेकिन जब उन्होंने (सोनिया गांधी ने) मनमोहन सिंह का नाम आगे किया तो उन्हें आश्चर्य हुआ था.

इससे पहले ये चर्चा होती रही है कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने विदेशी मूल के मुद्दे और बोफ़ोर्स कांड के नाम पर सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया था.

'प्रकाशित करें पत्र'

कलाम ने अपनी किताब में इस बात का भी ज़िक्र किया है कि उनके पास व्यक्तियों, संस्थाओं और राजनीतिक दलों से कई पत्र आए थे जिसमें सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री नियुक्त किए जाने का विरोध किया गया था.

उन्होंने लिखा है कि ये पत्र उन्होंने बिना टिप्पणी के एजेंसियों को भिजवा दिए थे.

सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि 17, मई, 2004 की दोपहर को 12.30 को वे भी राष्ट्रपति से मिले थे और उनसे कहा था कि सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री नियुक्त करने में क़ानूनी बाधा है.

फ़र्स्टपोस्ट डॉट कॉम को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि उसी दिन शाम पाँच बजे सोनिया गांधी को राष्ट्रपति से मिलना था जहाँ वे सरकार बनाने के लिए दावा पेश करने वालीं थीं.

उनका कहना है कि दोपहर तीन बजे सोनिया गांधी के पास राष्ट्रपति भवन से एक चिट्ठी पहुँची थी, जिसमें कहा गया था कि शाम पाँच बजे का अपॉइंटमेट रद्द किया जाता है और अगर वे चाहें को अगले दिन यानी 18 मई को मुलाक़ात हो सकती है.

जनता पार्टी नेता का दावा है कि जब ये पत्र सोनिया गांधी के पास पहुँचा तो वहाँ मनमोहन सिंह और नवटरसिंह मौजूद थे और उन्होंने ये पत्र देखा है.

स्वामी ने इस वीडियो इंटरव्यू में कहा है कि मनमोहन सिंह ने उस पत्र का एक पैरा ही सार्वजनिक रुप से पढ़ा था.

जनता पार्टी के नेता का कहना है, "अगर एपीजे अब्दुल कलाम उस पत्र का प्रकाशित नहीं करते हैं तो वे इतिहास के साथ न्याय नहीं करेंगे."

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नहीं जानते कि अब्दुल कलाम सच क्यों नहीं बता रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इससे ज़्यादा अहम सवाल ये है कि जो कुछ भी वे कह रहे हैं वे इस समय क्यों कह रहे हैं.

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