दो दिन में आएगा मॉनसून: मौसम विभाग

भारत में मॉनसून का इंतजार इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत के मौसम विभाग ने बीबीसी को बताया है कि अगले दो दिन में महाराष्ट्र और गुजरात में मॉनसून की बारिश होने की उम्मीद है. साथ ही कई उत्तर-पश्चिमी राज्यों में इस हफ्ते के अंत तक मॉनसून पहुंचने की संभावना है.

मौसम विभाग में मॉनसून मामलों के प्रवक्ता एस सी भान ने कहा, "अबतक औसत से 30 फीसदी कम बारिश हुई है लेकिन ये जल्द ही बदलने वाला है क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बना दबाव अगले दो-तीन दिनों में बारिश लाएगा."

उत्तर भारत के कई इलाके जहां झुलसा देने वाली गर्मी झेल रहे हैं, वहीं असम में बाढ़ के कारण अब तक 70 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मीटियरोलॉजी के पूर्व निदेशक जी बी पंत का मानना है कि भारत में मॉनसून की जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने की तकनीक में अब भी कमी है.

पंत ने बीबीसी को बताया, "मॉनसून विज्ञान में प्रशिक्षित लोगों की बहुत कमी है. इंजीनियरिंग और डॉक्टरी जैसे पेशों में ही छात्रों की रुचि है, इसलिए नए प्रशिक्षण प्रोग्राम और केन्द्रो की भी जरूरत है."

सूखे और बाढ़ जैसी स्थिति में मौसम विभाग का पूर्वानुमान अक्सर गलत होने पर पर पंत ने कहा कि सरकार ऐसी स्थिति में 'फायरफाइटिंग' करती ही दिखाई देती है. पंत के मुताबिक इस कमी की वजह 'दूरगामी सोच और अध्ययन की कमी' है.

आइए जानते हैं विभिन्न बीबीसी संवाददाताओं से उनके इलाकों का हाल.

मुंबई से ज़ुबैर अहमद

महाराष्ट्र में अब तक जो बारिश हुई है वो 31 प्रतिशत से कम है. आम तौर पर मुंबई में जून के पहले हफ्ते में मॉनसून आ जाता है और मॉनसून की पहली बूंदें गिरने लगती हैं. बारिश हुई है लेकिन इतनी कम कि पूछिए मत. अब तक मुंबई का मौसम सुहावना हो जाना चाहिए था और किसानों को भी जरूरत की बारिश मिलनी चाहिए थी.

राज्य के किसानों को काफी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि बारिश जरूरत के हिसाब से नहीं हुई है. मुंबई शहर में भी अगले एक हफ्ते में पानी की कटौती की घोषणा हुई है. करीब 10-11 प्रतिशत पानी की कटौती होने वाली है.

शहर में चिपचिपी गर्मी से लोगों की हालत खराब हो रही है.

राजस्थान से नारायण बारेठ

राजस्थान में आम तौर पर 20 जून के आसपास मॉनसून दाखिल होता है लेकिन इस वर्ष अभी तक सिर्फ एक दो बार बूंदाबांदी हुई है. इसका सबसे अधिक नुकसान किसानों को हो रहा है.

अच्छी बारिश हुई होती तो 40 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में बुआई हो गई होती. डेढ सौ लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल की बुआई होती है जो इस बारिश पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर 50 लाख हेक्टेयर पर बाजरे की खेती होती है. इसके आगे दलहन, मक्का, तिल, ज्वार की फसलों पर पानी नहीं होने का गंभीर असर पड़ेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार लोग मूंगफली बिल्कुल नहीं बो रहे हैं. बाजरा भी कम बोया जाएगा. लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें सरसों के लिए खेत खाली रखना है. शहरों में भी स्थिति खराब है. लोगों में चिंता व्याप्त है. गर्मी बदस्तूर जारी है, जिसे देखते हुए सरकार ने आठ जुलाई तक स्कूल बंद कर दिए हैं. सिर्फ पश्चिमी राजस्थान में थोड़ी बारिश हुई है लेकिन बाकी राज्य परेशान है.

बिहार से मणिकांत त्रिपाठी

बिहार में मॉनसून में दो हफ्ते की देर हो जाने से सूखे की आशंका उत्पन्न हो गई है.

बिहार में 11 से 13 जून के आसपास मॉनसून आता रहा है लेकिन इस बार अभी तक मानसून की बारिश नहीं हुई है.

मौसम विभाग के निदेशक डीसी गुप्ता ने बताया कि 1 से 29 जून की अवधि में बिहार में सिर्फ 89 मिलीमीटर वर्षा हुई है जबकि सामान्य तौर पर 159 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. यानी बारिश में 44 प्रतिशत की कमी अभी भी है.

मौसम विभाग ने वर्षा यंत्र में खराबी की बात को गलत करार दिया लेकिन कहा कि राज्य के सभी जिलों में वर्षा मापने का संयंत्र की कमी जरूर है. राज्य में जरूरत 78 यंत्रों की है जबकि राज्य में सिर्फ 27 ऐसे यंत्र हैं.

अधिकारियों का कहना था कि सूखे का खतरा गंभीर हो रहा है. बारिश की कमी ने धान की खेती पर भी बुरा असर डाला है. पैदावार कम होने की आशंका पैदा हो गई है.

उत्तर प्रदेश से रामदत्त त्रिपाठी

आषाढ़ का महीना बिना बारिश गुजर गया. सोमवार को भी तेज धूप और उमस से लोग बेहाल हैं. लेकिन रविवार को पुरवा हवा शुरू होने से अगले कुछ दिनों में बारिश की उम्मीद बढ़ी है.

मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार पांच जुलाई से बारिश की संभावना है. जुलाई के पहले दिन लखनऊ में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले सौ सालों में जुलाई का सबसे गर्म दिन रहा.

भीषण गरमी को देखते हुए प्रशासन ने कक्षा आठ तक के छात्रों के लिए छुट्टी आठ जुलाई तक बढ़ा दी है.

कायदे से देखा जाए तो मॉनसून कम से कम दो हफ्ते लेट होने जा रहा है. इस कारण खेती के लिए बिजली की मांग बढ़ गई है, ताकि किसान धान की पौध को जीवित रख सकें.

खरीफ की बाकी फसलों की बुआई रुकी हुई है.

बहरहाल ज्योतिष के जानकार कह रहे हैं कि जिस साल षड्मास यानी पुरुषोत्तम मास होता है, मौसम में इस तरह का फेरबदल हो जाता है. ज्योतिष के अनुसार पांच जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्र चालू होने के बाद बारिश की संभावना है.

दिल्ली

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी चिलचिलाती गर्मी पड़ रही है और पारा 40 के ऊपर ही है.

पिछले कुछ दिनों में आद्रता बढ़ी है और बारिश के आसार भी लेकिन बारिश का नामोनिशान भी नहीं दिखा है.

गर्मी के कारण स्कूलों की छुट्टियां भी आठ जुलाई तक बढ़ा दी गई हैं.

मौमस विभाग का कहना है कि इस हफ्ते बारिश की संभावना प्रबल है लेकिन तब तक शहर के लोग ही नहीं हरियाणा और दिल्ली से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की स्थिति खराब ही कही जा सकती है.

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