विधायक निधि से गाड़ी खरीदने के प्रस्ताव पर बवाल

  • 3 जुलाई 2012
Image caption मुख्यमंत्री का बचाव उनके वरिष्ठ सहयोगी आजम खान ने किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायक निधि से गाडी खरीदने का प्रस्ताव देकर बजट सत्र के आखिरी दिन विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है.

बजट पारित होने के बाद विधायकों के लिए तोहफे का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों की क्षेत्र विकास निधि सवा करोड से बढ़ाकर डेढ़ करोड कर दी जाएगी. साथ ही उन्होंने कहा कि विधायक अपने क्षेत्र में भ्रमण के लिए इसमें से बीस लाख रूपए तक की मोटर गाडी खरीद सकते हैं. सरकार ड्राइवर और मरम्मत आदि का खर्च अलग से नहीं देगी.

यह गाडी सरकार की संपत्ति रहेगी. पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद विधायक चाहें तो नियमानुसार गाडी के बाजार में घटे हुए मूल्य पर उसे खरीद सकते हैं.

मुख्यमंत्री ने सोचा होगा कि पूरा सदन तालियाँ बजाकर उनकी घोषणा का स्वागत करेगा. लेकिन दांव उलटा पड़ गया.

विपक्ष ने किया विरोध

भारतीय जनता पार्टी विधायक सतीश महाना ने विरोध की शुरुआत करते हुए कहा कि विधायक निधि क्षेत्र के विकास के लिए होती है और इस घोषणा से जनता में गलत संदेश जाएगा. विधायक अपने पैसे से गाडी खरीदेंगे तो भी लोग सोचेंगे कि यह विधायक निधि से खरीदी गाड़ी है.

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी विधान मंडल दल के नेता हुकुम सिंह, मुख्य विपक्षी बहुजन समाज पार्टी विधायक दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी सभी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया जिससे सत्ताधारी दल सकते में आ गया.

पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक बयान जारी कर मुख्यमंत्री से इस घोषणा को वापस लेने की मांग की.

सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह गलत निर्णय है.

लेकिन संसदीय कार्यमंत्री मोहम्मद आज़म खान ने मुख्यमंत्री की घोषणा का बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह सबके लिए जरुरी नही है, जो विधायक गाड़ी लेना चाहे वह ले लें. जो न लेना चाहें न लें.

विधानसभा के स्पीकर माता प्रसाद पांडे ने बाद में बीबीसी से बातचीत में कहा,“बहुत से ऐसे विधायक आते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है. वे बहुत परेशान होते हैं. बैंक उनको कर्ज भी नही देते. यह अनिवार्य नही है, इसलिए मुख्यमंत्री के प्रस्ताव से ऐसे गरीब विधायक गाड़ी खरीद सकते हैं. मगर यह अनिवार्य नहीं है. जो लेना चाहें ले लें. गाडी सरकार की संपत्ति रहेगी.”

अपने स्वयं का उदाहरण देते हुए पांडे ने बताया, “मै छह बार विधायक रहा हूँ पर मेरे पास गाडी नहीं है, माँगकर काम चलाता हूँ. अब अगर पैसा मिल जाएगा तो गाडी ले लूंगा."

ऐसे और भी बहुत से विधायक हैं जो मुख्यमंत्री के प्रस्ताव का समर्थन करते हैं. लेकिन विरोधी दलों ने कहा है कि वे विधायक निधि का उपयोग गाडी खरीदने के लिए नही करेंगे.

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