अच्छी बारिश की भविष्यवाणी हुई 284 साल पुरानी वेधशाला से

Image caption जयपुर के जंतर-मंतर वैधशाला के पुराने ज्योतिषीय यंत्रों के सहारे 'वायु परिक्षण' के बाद सामान्य वर्षा की भविष्यवाणी की गई है

भारत में रियासत काल में बनी जयपुर की प्राचीन वेधशाला - जंतर मंतर में ज्योतिष विद्वानों और पंडितो ने पुराने दौर के खगोल विज्ञान के सूत्रों का सहारा लेकर सामन्य वर्षा की भविष्यवाणी की है.

ज्योतिष विज्ञानी वर्षा के पूर्व अनुमान को सटीक बता रहे हैं. लेकिन मौसम विज्ञानी कहते है ऐसी घोषणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता है.

जयपुर के ज्योतिष शास्त्री और पंडित इस 284 साल पुरानी वेधशाला से हर साल वर्षा के बारे में पूर्व अनुमानों का ऐलान करते रहे हैं.

ये ज्योतिषाचार्य मंगलवार की शाम जंतर मंतर में जमा हुए, मंत्रोचार किया और फिर एक दल को लेकर वेधशाला में बने सबसे ऊँचे 'सम्राट यंत्र' के शिखर पर जा पहुंचे ताकि झंडे की मदद से पवन की दिशा का पता ले सकें.

सम्राट यंत्र पर वायु परीक्षण

ये यंत्र कोई 105 फीट ऊँचा है. पंडितों ने हवा की दिशा और स्वभाव जानने के लिए आषाढ़ पूर्णिमा के सूर्यास्त का समय चुना.

इन पंडितों ने बाद में बैठक कर सभी पहलुओं की समीक्षा की और कहा कि 'वायु परीक्षण' ने सामान्य वर्षा का संकेत दिया है.

जंतर मंतर के अधीक्षक ओम प्रकाश शर्मा ने इस परीक्षण के परिणामों के बारे में बताया और कहा कि हवा का रुख पुरवाई था और ये शुभ संकेत है.

उनका कहना था,''हमने सबसे ऊंचाई वाले सम्राट यंत्र पर शाम 7.19 पर वायु परीक्षण किया. हमें अच्छे संकेत मिले हैं.क्योंकि वायु पूर्व से पश्चिम की और जा रही थी. गत वर्ष भी हवा का यही रुख था. पुरवाई वर्षा के आसार के लिए अच्छी माना जाती है."

शर्मा के मुताबिक,"यूँ तो इस जंतर मंतर पर ये परीक्षण रियासती काल से होता रहा है और मैं खुद पिछले 37 साल से इसमें शामिल होता रहा हूँ. प्राय ये अनुमान सही जाते रहे हैं. हालाँकि चार पांच बार अनुमान कमजोर रहे. ज्योतिष विज्ञान में वर्षा भी एक भाग है. उसमें कार्तिक शुदा प्रतिपदा यानि नवम्बर से जून तक का समय वर्षा का गर्भाधान काल कहलाता है. इस आठ माह के काल के योग भी हम इस अनुमान में शामिल करते हैं.हम दोनों को मिलकर परिणाम निकालते हैं - हवा का रुख और ये आठ माह का योग. इसके लिए यही पूर्णिमा का समय सही है."

जयुपर के राजा सवाई जय सिंह कुशल योद्धा थे तो खगोल विज्ञान में भी उनकी गहरी दिलचस्पी थी. इस वेधशाला का निर्माण जय सिंह ने ही करवाया था.

पहली वेधशाला 1724 में दिल्ली में बनी और इसके 15 वर्ष बाद जयपुर का जंतर मंतर वजूद में आया.

जय सिंह ने ही सम्राट यंत्र के अविष्कार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. इसका शिखर ठीक आकाश के ध्रुव की जानकारी देता है. इस पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं. इन सीढ़ियों के दोनों तरफ की दीवारों के बाहरी किनारे समय बताने में बड़ी मदद करते हैं क्योंकि ये धरती की धुरी के समानांतर हैं और इनकी परछाई से लोग समय का पता लगाते हैं.

ज्योतिष विज्ञानी सतीश शास्त्री का दावा है ये पूरी तरह वैज्ञानिक है.

वे कहते हैं, "हमने पूर्णिमा का गणित किया है. सूर्यास्त में हमने पवन धारणा देखी है. जब मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा पूर्व आसाढ से लेकर तीन माह तक गर्भ धारण होता है. उसी प्रकार वायु का भी गर्भ धारण होता है. मानसून बंधे या नहीं, लेकिन हमें तो अच्छे लक्ष्ण मिले हैं. अभी सात दिन तक हमारे पंचागों के मुताबिक रोहिणी तपा है रोहिणी नक्षत्र में सूर्य बहुत तपा. तब थोड़ी निराशा हुई, मगर इस वायु परीक्षण ने फिर अच्छे संकेत दे दिए हैं. अभी हम ये कह सकते हैं 40 से 60 फीसद तक अच्छी वर्षा हो सकती है.

मौसम विभाग ने खारिज किया

जयपुर में मौसम विभाग के निदेशक एसएस सिंह कहते हैं कि ऐसे पूर्व अनुमानों में कोई दम नहीं होता है.

एसएस सिंह का कहना था, "आप सोचिए कोई एक दिन की हवा के रुख से कैसे निष्कर्ष निकाल सकता है. ये न तर्क है न विज्ञान है. हमें इसमें कोई भरोसा नहीं है."

राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऐके सिन्हा कहते हैं, "ऐसे पूर्व अनुमानों की विधि कितनी वैज्ञानिक है, बिना अध्यन किए ये कहना मुश्किल है. हाँ, ये एक पारंपरिक तरीका है जो कुछ अनुमानों पर आधारित है....ये सही है कि पुरवाई वर्षा के लिए ठीक है जबकि पश्चिम मुखी हवा खुश्की लाती है."

जंतर मंतर को दो साल पहले ही विश्व धरोहर में शामिल किया गया है.

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