छत्तीसगढ़: 'मुठभेड़' की होगी न्यायिक जांच

  • 5 जुलाई 2012
छत्तीसगढ़
Image caption सुरक्षाबलों पर आरोप है कि उन्होंने निर्दोष ग्रामीण आदिवासियों को मारा है.

छत्तीसगढ़ की सरकार ने राज्य के बीजापुर के बासागुडा में 28 जून की रात सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई कथित मुठभेड़ की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है.

यह फैसला राज्य के मंत्रीमंडल की बैठक में बृहस्पतिवार की शाम को लिया गया.

मुख्य मंत्री रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के न्यायाधीश उस घटना के सभी पहलुओं की जांच करेंगे जिसमे सुरक्षाबलों नें दावा किया है कि उन्होंने 19 माओवादियों को मारा है.

सुरक्षाबलों पर आरोप है कि उन्होंने निर्दोष ग्रामीण आदिवासियों को मारा है.

अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए 19 लोग माओवादी छापामार ही थे या नहीं मगर सुरक्षा बलों का दावा है कि उनपर सबसे पहले माओवादियों नें गोलियां चलाकर हमला किया था.

हथियार मिले

Image caption ग्रामीण कहते हैं कि सुरक्षा बलों के जवान चारों तरफ से गोलियां चला रहे थे.

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के एक बड़े अधिकारी ने दावा किया है कि कथित मुठभेड़ के बाद उन्होंने घटना स्थल से नक्सली साहित्य, विस्फोटक सामग्री के साथ-साथ चार देसी बंदूकें भी बरामद की हैं.

उक्त अधिकारी जिन्होंने इस अभियान का नेतृत्व किया था कहते हैं कि सुरक्षा बलों के जवानों पर अत्याधुनिक हथियारों से गोलियां चलाई गई थी.

वह यह भी कहते हैं कि पहले सारके गुडा और कोट्टा गुडा में मौजूद माओवादियों नें उनपर गोलियां चलाई थीं और जवाबी कारावाई में सुरक्षाबलों नें भी गोलियां चलाई थी.

मगर इस मामले का गंभीर पहलू यह है कि घटना स्थल से हथियार बरामद किए जाने का जो दावा सुरक्षा बल के अधिकारी कर रहे हैं उनमे से एक भी अत्याधुनिक हथियार नहीं है.

सारके गुडा और कोट्टा गुडा के आदिवासियों नें बीबीसी को बताया है कि जब ग्रामीणों की बैठक चल रही थी उसी वक्त उन्हें चारों तरफ से सुरक्षाबलों के जवानों ने घेर लिया था.

क्या कहते हैं ग्रामीण?

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बैठक में कोई भी नक्सली नहीं मौजूद था. वो ये भी कहते हैं कि सुरक्षा बलों के जवान चारों तरफ से गोलियां चला रहे थे.

सारके गुडा की कमला काका और उनके साथ गाँव में मौजूद आदिवासियों का कहना है कि सुरक्षा बलों के जवानों को माओवादियों की गोली नहीं बल्कि खुद की गोलियां लगी हैं.

कमला काका कहती हैं, “हम सब बीच मैदान में बैठे थे. चारों तरफ से गोलियां चल रहीं थी. वही गोलियां सुरक्षाबल के जवानों को आपस में लगी हैं. उनकी गोलीबारी में गाँव के बैल मरे, सूअर मरे. जो लोग भग रहे थे उनपर सुरक्षाबल के जवान ही गोलियां चला रहे थे. उन्हें खुद की गोलियां लगी हैं और वह कह रहे हैं माओवादियों नें गोलियां चलायीं हैं. बैठक में सिर्फ ग्रामीण थे."

वहीँ केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल ने जो घायल जवानों की मेडिकल रिपोर्ट बीबीसी को दी है उसमे सिर्फ एक जवान हवालदार के.राजन के पैर में छर्रे के ज़ख्म की बात कही गई है, जबकि बाकी के पांच जवानों को अत्याधुनिक हत्यारों की गोलियों के जख्म हैं. यह वही हथियार हैं जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बल के जवान ही करते हैं.

जिन जवानों को अत्याधुनिक हथियारों की गोलियां लगी हैं उनमे कोबरा बटालियन के गयेंद्र सिंह, वहीदुल इस्लाम, अरुनव घोष, किशन कुमार और एसएस राणा शामिल हैं जिनका इलाज रायपुर के अस्पताल में चल रहा है.

वो नक्सली थे?

जहाँ तक सुरक्षा बलों का दावा है कि मुठभेड़ में मारे गए सभी नक्सली थे तो इस बात की भी अभी तक उनकी तरफ से कोई पुष्टि नहीं हो पाई है. सुरक्षाबल और पुलिस का दावा है कि मारे गए लोगों में से पांच की शिनाख्त हो चुकी है और वह सब नक्सली हैं.

इस मामले नें और तूल पकड़ना शुरू कर दिया है जब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस ने घटना से सम्बंधित अपनी रिपोर्टें सौंपकर आरोप लगाय है कि सारके गुडा और कोट्टा गुडा में मारे गए ग्रामीणों में आठ नाबालिग बच्चे हैं जिनकी उम्र 13 साल से लेकर 16 साल के बीच है. घायलों में भी तीन नाबालिग बच्चे हैं.

प्रदेश कांग्रेस नें अपनी जांच रिपोर्ट पार्टी हाई कमान को सौंप दी है. इस जांच का नेतृत्व कांग्रेस के बस्तर से एक मात्र विधायक कवासी लखमा कर रहे थे. वहीँ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नें बीबीसी से बात करते हुई आरोप लगाया है कि बासागुडा की घटना मुठभेड़ नहीं 'नरसंहार' है.

गृह मंत्रालय पर दबाव

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Image caption आदिवासियों का कहना है कि सुरक्षा बलों के जवानों को माओवादियों की गोली नहीं बल्कि खुद की गोलियां लगी हैं.

हालांकि गृह मंत्री पी चिदंबरम पहले ये कह चुके हैं कि मरने वाले सभी लोग माओवादी ही थे मगर पार्टी के अंदर से पैदा हो रहे दबाव के कारण उन्हें अब कहना पड़ रहा है कि अगर किसी ग्रामीण की मौत हुई है तो वो इसके लिए खेद प्रकट करते हैं.

जनजातीय मामलों के मंत्री किशोर चंद्र देव ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ की सरकार गृह मंत्री को गलत जानकारी दे रही है. वहीँ खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चरण दास महंत ने भी ऐसा ही कुछ आरोप लगाया है.

बहरहाल अब गृह मंत्रालय नें इस पूरे मामले पर केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बल के वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली से बीजापुर पहुँच चुके हैं और घटना की जांच कर रहे हैं.

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