मायावती के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सीबीआई को यह मामला दर्ज ही नहीं करना था

सुप्रीम कोर्ट ने बीएसपी प्रमुख मायावती के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले की सीबीआई जाँच को ख़ारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चूंकि अदालत ने सीबीआई को आय से अधिक संपत्ति की जाँच करने के आदेश नहीं दिए थे इसलिए उसे ये मामला दर्ज ही नहीं करना था.

अदालत ने कहा, "इस इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि हमने वर्ष 1995 से 2003 के बीच हमने मायावती की कथित असंगत संपत्ति की जाँच के कोई निर्देश नहीं दिए थे."

सीबीआई दावा करती रही है कि उसके पास मायावती की आय से अधिक संपत्ति के सबूत मौजूद हैं.

मायावती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई की जाँच को चुनौती दी थी और कहा था कि सीबीआई राजनीतिक साज़िश के तहत काम कर रही है.

जाँच खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसके आदेश के ठीक तरह से समझे बिना ही सीबीआई ने जाँच शुरु कर दी.

जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा है, "ताज कॉरिडोर घोटाले के अलावा कोई और मामला अदालत के सामने था ही नहीं. मायावती की आय से अधिक संपत्ति के मामले में न कोई सूचना है और न कोई रिपोर्ट पेश की गई है."

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Image caption मायावती को मिलने वाले कथित उपहार ख़बरों में भी रहे हैं

मायावती ने मई, 2008 में एजेंसी की ओर से दर्ज किए गए आय से अधिक संपत्ति मामले में आपराधिक प्रक्रिया के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी.

अपनी याचिका में मायावती ने यह गुजारिश भी की थी कि सुप्रीम कोर्ट सीबीआई को निर्देश दे कि वह आयकर ट्राइब्यूनल की ओर से संपत्ति को जायज ठहराने संबंधी आदेश पर गौर करे.

इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है.

सीबीआई का कहना है कि उसके पास मायावती के ख़िलाफ़ पर्याप्त सुबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि उन्होंने अपने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की है.

मायावती का दावा करती रही हैं कि उन्हें यह रकम पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से दान के रूप में मिली है.

मगर एजेंसी का कहना है कि मायावती के पास 2003 में घोषित संपत्ति एक करोड़ रुपये की थी जो 2007 में 50 करोड़ तक पहुंच गई.

सीबीआई का कहना है कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री की नगद राशि, चल व अचल संपत्तियों और उपहारों के बारे में एजेंसी ने पुख्ता सबूत जुटाए हैं.

बहुजन समाज पार्टी के नेता एससी मिश्रा ने इस फ़ैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर की है लेकिन कहा है कि इसे राष्ट्रपति चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के समर्थन से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए.

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