श्रीलंका के प्रशिक्षु वायु सेनाकर्मी वापस भेजे गए

  • 6 जुलाई 2012
जयललिता इमेज कॉपीरइट aiadmk
Image caption जयललिता ने कड़े शब्दों में सरकार के फैसले की निंदा की थी

तमिलनाडु के राजनेताओं के दबाव में रक्षा मंत्रालय ने भारत में प्रशिक्षण के लिए आए श्रीलंका के वायु सेनाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला किया है.

रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है. इसमें कहा गया है- रक्षा मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक श्रीलंका के सभी प्रशिक्षु वायु सेनाकर्मियों को वापस भेजा जा रहा है.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने चेन्नई के तंबरम एयरबेस में श्रीलंका के वायु सेनाकर्मियों के प्रशिक्षण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी.

उन्होंने कहा था कि ये तमिलों की भावनाओं के खिलाफ है.

समर्थन

गुरुवार को अपने बयान में जयललिता ने कहा था, "ऐसे समय जब श्रीलंका में तमिलों को बराबर का दर्जा दिए जाने की मांग उठ रही है, श्रीलंका के वायु सेनाकर्मियों को तंबरम एयरफोर्स बेस पर ट्रेनिंग दिए जाने की खबर तमिलों के लिए चकित करने वाली है. मैं इसकी निंदा करती हूँ."

केंद्रीय जहाजरानी मंत्री जीके वासन ने भी इस मामले में जयललिता के रुख का समर्थन किया था.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक जीके वासन ने कहा था कि चेन्नई के तंबरम एयरबेस पर श्रीलंकाई वायु सेनाकर्मियों का प्रशिक्षण चिंता का विषय है.

उन्होंने कहा था कि वे इससे असहमत हैं कि श्रीलंका वायुसेना कर्मियों को यहाँ प्रशिक्षण दिया जाए.

विरोध

इस मामले पर स्थानीय पत्रकार दिलीप चारी ने कहा कि तमिलनाडु में राजनीतिक विरोध गहरा हो गया था.

उन्होंने कहा, "श्रीलंकाई सेना के खिलाफ यहां काफी असंतोष फैला हुआ है. तमिलों की भावनाओ का कोई भी मामला यहां होता है, वो जरूर राजनीतिक रूप लेता है. इसलिए सभी तमिल दलों की ये मांग थी की उन्हें वापस भेजा जाए. श्रीलंका सरकार के खिलाफ जो भी तमिलों की भावना है ये उसी का परिचायक है."

साथ ही दिलीप चारी ने ये भी माना कि मिली जुली सरकार के धर्म में घटक दल को मनाने के लिए विदेश नीति भी प्रभावित हो रही है.

उन्होंने कहा, "विदेश नीति बिल्कुल प्रभावित हो रही है. लेकिन केंद्र को इस बात का भान नहीं है कि कौन से राज्य में किस मुद्दे का गहरे विचार हो सकते हैं. जब विरोध प्रखर होता है तब उन्हें आभास होता है कि ये तो गलत हो गय़ा. केंद्र सरकार का इन दिनों जो भी ढांचा है उसमें सबसे पहले ये देखना पड़ता है कि घटक दल नाराज न हो जाए. इसमें स्वाभाविक है नुकसान होना ही है, देश का भी नुकसान होता है."

एमडीएमके ने भी इस मामले पर विरोध प्रदर्शन की धमकी दी थी. जबकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) में शामिल द्रमुक ने भी इस फैसले का विरोध किया था.

संबंधित समाचार