आंध्र में किसानों के लिए जानलेवा बना माइक्रो फ़ाइनेंस

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हैदराबाद से एक घंटे की दूरी पर बसे गाँव हाजीपल्ली में एक बूढी महिला बीबीसी की टीम को देखते ही रो पड़ती है.

उसे पता है की हम उसके बेटे की मौत के कारण के बारे में जानकारी लेने आये हैं. बेटे ने डेढ़ साल पहले कर्जों के कारण आत्म हत्या कर ली थी. लेकिन इस महिला का ग़म अब भी ताज़ा है.

बेटे ने अपने परिवार की ज़िन्दगी बनाने के लिए एक माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनी से क़र्ज़ लिया था लेकिन जब वो क़र्ज़ लौटा नहीं पाया तो उसकी पत्नी के अनुसार कंपनी वालों ने उसे पूरे गाँव के सामने ज़लील किया. इस बेइज्ज़ती को वह बर्दाश्त न कर सका और उसने आत्म हत्या कर ली.

उनकी पत्नी जन्गाम्मा कहती हैं: "हम दो महीने तक क़र्ज़ लौटा नहीं सके. वो हमारे गाँव आये और उन्होंने काफी हंगामा किया. उन्होंने कहा या तो मंगलसूत्र बेचो वरना मरने के लिए तैयार रहो. मेरे पति यह बेईज्ज़ती बर्दाश्त नहीं कर सके और ज़हर खा कर आत्म हत्या कर ली."

जन्गाम्मा के पति की तरह कर्जों की अदायगी न होने से बेइज्ज़ती पर कई गाँव वालों ने आत्म हत्या की है.

आंध्र प्रदेश में माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों के कर्जों को अदा न करने वालों की संख्या नब्बे लाख है. उन पर इन कंपनियों का पांच अरब डॉलर का कर्ज़ है जो अब डूब गया है.

इस तरह फल फूल रहा यह व्यापार लगभग तबाह हो गया है. माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों का उद्देश है किसानों और ग़रीब लोगों को छोटे क़र्ज़ देना.

इन कंपनियों के खिलाफ कई इलज़ाम हैं जिनमें मुख्य यह है कि एक ही आदमी को कई माइक्रो फ़ाइनेंस कम्पनियाँ क़र्ज़ दे रही थीं.

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Image caption जन्गाम्मा अपने पति को गँवा चुकी हैं

ब्याज दर 50 से 60 प्रतिशत था और क़र्ज़ की वसूली के दौरान बल का इस्तेमाल किया जा रहा था.

ट्राइडेंट कंपनी के अध्यक्ष किशोर कुमार कहते हैं कि वो अब पिछली ग़लतियों को नहीं दोहरा रहे हैं, "हम ने ग़लतियाँ की हैं और इसका भुगतान भी किया है. हमारी कंपनी लगभग डूब गयी थी लेकिन अब हमने बैंक से नए क़र्ज़ मांगे हैं. इस उम्मीद में कि हमारा व्यापार एक बार फिर से चल पड़ेगा."

माइक्रो फ़ाइनेंस के भविष्य के बारे में दो हफ्ता पहले हैदराबाद में विचार किया गया. इस बैठक में सभी माइक्रो फ़ाइनेंस कम्पनियां शामिल थीं. इस व्यापार को नए सिरे से शुरू करने पर सहमति हुई.

केंद्र सरकार ने संसद में एक बिल पेश किया है जो इस उद्योग पर निगरानी रखने की तरफ एक क़दम है. आंध्रप्रदेश सरकार ने पिछले साल माइक्रो फ़ाइनेंस उद्योग में गड़बड़ी की रोक थाम के लिए एक कानून बनाया था जिस से इस उद्योग को काफी बड़ा झटका लगा.

नेताओं पर आरोप

विजय महाजन माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों के संगठन के अध्यक्ष हैं.

वो कहते हैं कि नेता माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों के साथ सियासत कर रहे हैं:"अधिकतर नेता और सरकारी बाबू यह चाहते हैं की ग़रीबों को मुफ्त कर्ज़ मिले. और यह मुनासिब है नहीं, क्योंकि आप 100 -200 लोगों को मुफ्त क़र्ज़ दे सकते हैं लेकिन आप करोड़ों लोगों की ज़रुरत पूरी नहीं कर सकेंगे. उसके लिए माइक्रो फ़ाइनेंस का तरीका सब से मुनासिब है"

राज्य सरकार अब महिलाओं का मनोबल बढ़ाने और उन्हें शक्तिशाली बनाने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है. महिलाओं ने अपनी मदद आप करने की ठान ली है.

हर गाँव में महिलाओं की टीम बनाई गई है जिसे सरकार शून्य प्रतिशत पर ऋण देती है.

राज्य के ग्रामीण इलाकों के विकास के मंत्री हैं वरा प्रसाद राव. वो कहते हैं "माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों के खिलाफ काफी शिकायतें आ रही थीं जिसके कारण उन्हें पिछले साल एक नया कानून पारित करना पड़ा ताकि गाँव वालों की सुरक्षा की जा सके. जिस तरह की ग़लतियाँ यह कम्पनियाँ कर रही हैं मुझे शक नहीं की पूरा उद्योग नष्ट हो जाएगा."

माइक्रो फ़ाइनेंस उद्योग को देश के अन्य राज्यों में भी संकट का सामना करना पड़ रहा है.

कम्पनियों ने तय किया है की अब वो ग़लतियाँ नहीं करेंगे जो वो करते आ रहे थे और अपनी कमाई के साथ साथ जनता के हित का भी ख्याल रखेंगे . शायद इसी में उनकी भलाई है.

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