बेस्ट बेकरी मामले में पाँच अभियुक्त बरी

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Image caption हाईकोर्ट ने 2006 में दोषी ठहराए गए नौ लोगों की अपील पर फ़ैसला सुनाया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2002 के बहुचर्चित बेस्ट बेकरी दंगा मामले में पाँच आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है.

मगर अदालत ने चार अन्य अभियुक्तों को सुनाई गई निचली अदालत की उम्रक़ैद की सज़ा को बहाल रखा है.

एक मार्च 2002 को, गोधरा कांड के दो दिन बाद, भीड़ ने वडोदरा में बेस्ट बेकरी पर हमला कर दिया था. वहाँ लूटपाट और आगज़नी में 14 लोग मारे गए.

दंगाईयों ने बेकरी चलानेवाले शेख परिवार समेत अन्य मुसलमानों को निशाना बनाया था मगर हमले में तीन हिंदू मज़दूर भी मारे गए.

इस मामले में 17 लोगों पर आरोप लगा था. 2006 में मुंबई की एक विशेष अदालत ने इनमें से नौ को दोषी ठहराते हुए सज़ा सुनाई थी.

इसके बाद इन नौ लोगों ने हाईकोर्ट में अपील की थी.

सुनवाई

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई में मुख्य रूप से बेस्ट बेकरी में काम करनेवाले चार घायल मज़दूरों की गवाही को आधार बनाया.

इन लोगों ने आरोपी व्यक्तियों की पहचान की थी और कहा था कि वे गोधरा दंगों के दौरान घटनास्थल पर तलवार और अन्य घातक हथियार लेकर मौजूद थे.

मगर अदालत ने इनमें से पाँच लोगों को ये कहते हुए बरी कर दिया कि ना तो उनके खिलाफ़ सबूत थे ना ही गवाहों ने दंगों में उनकी किसी तरह की भूमिका की बात बताई थी.

हालाँकि इस मामले की सुनवाई के दौरान एक नाटकीय घटना हुई जब एक गवाह यास्मीन शेख़ ने हाईकोर्ट में याचिका देकर कहा कि उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने ग़लत गवाह देने के लिए लोभ दिया गया और गुमराह किया था.

गवाह ने अपना बयान अपील की सुनवाई के दौरान फिर दर्ज किए जाने का आग्रह किया था.

मगर अदालत ने कहा कि वो पहले दोषी ठहराए गए लोगों की अपील पर सुनवाई करेगी.

इसके बाद तीस्ता सीतलवाड़ ने भी एक याचिका दर्ज कर अपनी बात भी सुने जाने का आग्रह किया था.

यास्मीन शेख़ और तीस्ता सीतलवाड़ की याचिकाओं पर अदालत का निर्णय बाद में आएगा.

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