बच्ची को 'मूत्र पिलाने' वाली वॉर्डन निलंबित

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Image caption अभियुक्त वॉर्डन उमा पोद्दार को अदालत ने जमानत दे दी है.

पश्चिम बंगाल में 10 साल की एक बच्ची को कथित तौर पर उसके होस्टल में अपना ही मूत्र पीने के लिए मजबूर किए जाने के मामले में अभियुक्त वॉर्डन को निलंबित कर दिया गया है.

ये मामला शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय से जुड़े एक स्कूल का है जहां पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची को बिस्तर गीला करने की आदत छुड़ाने के नाम पर वॉर्डन ने उसे कथित तौर पर अपना पेशाब पीने के लिए मजबूर किया.

बच्ची के पिता मनोज मिस्त्री ने बीबीसी को बताया, “नींद मे बिस्तर गीला करने के बाद बच्ची को उस पर नमक डाल कर चटवाया गया है. ये घटना खुद वॉर्डन उमा पोद्दार ने मेरी पत्नी को बताई.”

मिस्त्री के मुताबिक वॉर्डन ने ये बात उस वक्त बताई जब बच्ची की मां ने उसका हालचाल जानने के लिए होस्टल में फोन किया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अभियुक्त वॉर्डन को निलंबित कर दिया गया है. इससे पहले उन्हें गिरफ्तार कर बोलपुर की अदालत के सामने पेश किया गया जहां से उन्हें जमानत दे दी गई.

जांच करेगा विश्व भारती

ये बच्ची विश्व भारती विश्वविद्यालय से जुड़े पाठ भवन स्कूल के काराबी हॉस्टल में रह रही थी. ये वही स्कूल है जहां से जाने माने अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और जयपुर की महारानी गायत्री देवी जैसी कई जानी मानी हस्तियों ने शिक्षा हासिल की थी.

इस घटना के बारे में पता चलने के बाद मनोज मिस्त्री, उनकी पत्नी और परिवार वाले होस्टल पहुंचे तो उनके खिलाफ होस्टल परिसर में जबरन घुसने का मामला दर्ज कर लिया गया.

उन्हें सोमवार को गिरफ्तार कर बोलपुर की अदालत में पेश किया गया जहां उन्हें जमानत दे दी गई. है.

उधर विश्व भारती ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यों की एक समिति बनाई है. विश्वविद्यालय के प्रवक्ता अमृत सेन ने कहा, “इस आरोप के मद्देनजर विश्व भारत के अधिकारियों ने तुंरत चार सदस्यों वाली एक समिति बनाई है जो मामले की जांच करेगी.”

दोषी को सजा की मांग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.

आयोग की अध्यक्ष शारदा सिन्हा कहती हैं, “शांति निकेतन में जहां से रवींद्र नाथ टैगोर ने दुनिया को बताया कि शिक्षा कैसी होनी चाहिए, उसका स्तर क्या होना चाहिए और शिक्षा के जरिए बच्चों को किस तरह की आजादी दी जानी चाहिए, वहां इस तरह की घटना होना बहुत ही शर्मनाक और दुखद है.”

मिस्त्री इस घटना के बाद प्रशासन के रवैये से भी खासे नराज हैं. उन्होंने कहा, “मुझे हवालात में डाला गया. इस बात का मुझे बहुत दुख है. मेरा कसूर क्या है. मैं अपनी बेटी के लिए और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए उसके साथ खड़ा था. लेकिन मुझे हवालात में जाना पड़ा.”

मनोज मिस्त्री का कहना है कि वो इस बारे में सोचेंगे कि उन्हें अपनी बेटी को विश्व भारती में पढ़ाना है या नहीं.

शांता सिन्हा के अनुसार इस तरह की घटनाएं हमेशा से होती रही हैं. लेकिन अब मीडिया और समाज में बढ़ती जागरुकता से इस तरह के मामले प्रकाश में आ रहे हैं.

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