वकीलों की दो दिनों की हड़ताल आज से

Image caption हड़ताल को भारत के 19 राज्यों की बार काउंसिलों का समर्थन हासिल है

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 11 और 12 जुलाई को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल कर उच्च शिक्षा और शोध विधेयक पर अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है.

इस दो दिवसीय हड़ताल में देश के अलग- अलग राज्यों के लाखों वकीलों के हिस्सा लेने की संभावना है.

वकीलों के शीर्ष संगठन बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि उच्च शिक्षा और शोध विधेयक 2011 के विरोध में भारत के लगभग 17 लाख अधिवक्ता अपने काम पर नही जाएंगे.

हालांकि इस हड़ताल में सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के वकील शामिल नही होंगे, लेकिन वो भी विरोध स्वरुप सफेद पट्टी बांध कर काम करेंगे.

उच्च शिक्षा और शोध विधेयक 2011

मनन मिश्रा का कहना है, "मानव संसाधन विकास मंत्रालय कुछ ऐसे विधेयक ला रहा है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है उच्च शिक्षा और शोध विधेयक 2011. इस विधेयक के जरिए पूरी शिक्षा प्रणाली को सरकार अपने द्वारा नामांकित किए कुछ प्रतिनिधियों को सौपने जा रही है, जिसका बार काउंसिल विरोध करती है."

बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि ये विधेयक उनके अधिकारों को छीनने और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हाथों में उन्हें सौंपने का प्रयास है.

मनन मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल की मांग है कि इस विधेयक से कानूनी शिक्षा और ऐडवोकेट एक्ट को अलग कर दिया जाए.

उन्होंने कहा कि बार काउंसिल का अधिकार रहा है कि उसके पास एक उच्च स्तरीय समिति होती है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज, मुख्य न्यायाधीश, राज्यों के न्यायाधीश और शिक्षाविद होते हैं जो फैसले करते हैं.

उनके अनुसार अब इनकी जगह सरकार के नामित चंद लोगों को रखे जाने का प्रस्ताव है.

'कानून की पढ़ाई में हस्तक्षेप'

काउंसिल का मानना है कि प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से सरकार विधि के क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहती है.

इसे वकालत के पेशे की स्वतंत्रता पर हमला बताया गया है. काउंसिल का कहना है कि किसी भी स्थिति में ये विधेयक स्वीकार नहीं किया जा सकता.

कांउसिल का कहना है कि जो प्रणाली अब तक चल रही है, उसकी कमियों को खोजा जाना चाहिए.

विरोध जताने का फैसला बार बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने राज्य बार काउंसिल की 19 मई की संयुक्त बैठक में लिया था. इस हड़ताल को भारत के 19 राज्यों की बार काउंसिलों का समर्थन हासिल है.

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