'आईस्क्रीम खरीद सकते हैं, आटे-चावल में एक रुपए की वृद्धि बर्दाश्त नहीं'

  • 11 जुलाई 2012
Image caption चिदंबरम ने कहा कि जन समस्याओं को केवल मध्यमवर्गीय लोगों के परिपेक्ष्य में नहीं देखा जाना चाहिए.

गृह मंत्री पी चिदंबरम एक बार फिर विवादित बयान देकर चर्चा में आ गए हैं. उन्होंने कहा है कि ‘भारत के मध्यम वर्ग के लोग महंगी आइस क्रीम खाते हैं, 15 रुपए की मिनरल वॉटर की बोतल खरीदते हैं, पर गेहूं-चावल के दामों में एक रुपए की वृद्धि बर्दाश्त नहीं करते.'

चिदंबरम मंगलवार को बंगलौर में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे जब उन्होंने ये बयान दिया.

उनके इस बयान की विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कड़े शब्दों में आलोचना की है. बीजेपी ने कहा है कि गृह मंत्री ने जनता के प्रति असंवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनका मजाक उड़ाया है.

बीजेपी के प्रवक्ता राजीव रूडी ने कहा, “पी चिदंबरम ने मध्यमवर्गीय लोगों का मजाक उड़ाते हुए उनके खिलाफ बे सिर-पैर की बाते कहीं है. भारतीय जनता पार्टी इसे सरकार के भीतर व्याप्त अंतरविरोध का मामला मानकर देख रही है.”

उन्होंने कहा है कि सरकार देश की चीजों की कीमतों को नियंत्रण में रखने में या समस्या का हल ढूंढने में नाकाम साबित हुई है.

विपक्ष का प्रहार

रूडी ने कहा, “ये बिल्कुल असंवेदनशील टिप्पणी है और भारतीय जनता पार्टी इसकी निंदा करती है. लेकिन इस सरकार और इसके मंत्रियों से इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है.”

एक अन्य बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि चिदंबरम आम आदमी का दर्द समझते ही नहीं हैं. उनका दायरा वातानुकूलित कमरों और हवाई यात्राओं तक ही सीमित है.

उन्होंने कहा कि जिस देश में 50-60 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं, वहां चिदंबरम का ऐसा बयान लोगों का मजाक उड़ाता है.

इससे पूर्व बंगलौर में सम्मेलन में चिदंबरम ने सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि जन समस्याओं को केवल मध्यमवर्गीय लोगों के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए.

यूपीए सरकार के पिछले तीन वर्षों का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए चिदंबरम ने कहा कि भारत जल्द ही विकास के पथ पर चल पड़ेगा और इसके लिए सुधार के कई उपाय किए जाएंगे.

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