मूत्र सेवन पारंपरिक इलाज है: अग्निवेश

  • 11 जुलाई 2012
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Image caption अग्निवेश इससे पहले अन्ना आंदोलन में भी विवादों में घिर चुके हैं.

विश्व भारती में कक्षा पांचवी के बच्ची को अपना मूत्र चाटने पर मजबूर करने के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अग्निवेश के बयान से और विवाद पैदा होने की आशंका बढ़ गई है.

अग्निवेश का कहना था कि बच्चों को अपना मूत्र पिलाना पारंपरिक इलाज है ताकि बच्चे बिस्तर पर पेशाब न करें.

अग्निवेश ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘ होस्टल के वार्डन उमा पोद्दार के इस सुझाव पर इतना बवाल क्यों मचा हुआ है जो उन्होंने उस बच्ची को दिया था कि वो अपना मूत्र ही चाटे जिससे बिस्तर पर पेशाब करने की आदत छूट जाए.’’

यह घटना शनिवार की है जब यूनिवर्सिटी के कराबी होस्टल की वार्डन ने एख छोटी बच्ची को अपना ही मूत्र पीने पर उस समय मजबूर किया जब बच्ची ने बिस्तर गीला कर दिया था.

अग्निवेश का कहना था कि उन्हें जवानी तक बिस्तर गीला करने की समस्या थी और इससे निपटने के लिए उन्होंने शिवांबू या स्वमूत्र चिकित्सा पद्धति का सहारा लिया था.

उनका कहना था कि उन्होंने अंबाला जेल में आपातकाल के दौरान यह चिकित्सा अपनाई थी.

उनका कहना था, ‘‘ कई लोगों के लिए यह इलाज़ सामंती या घृणास्पद लग सकता है लेकिन मैंने कई महीनों तक इसका अभ्यास किया है. मैंने पुस्तकों में प्राकृतिक उपचार के बारे में पढ़ा और यह तरीका पाया. शिवांबू से मेरी समस्या ठीक हो गई.’’

अग्निवेश ने इस संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल का उदाहरण भी दिया.

उमा पोद्दार को सोमवार के दिन बच्ची के अभिभावकों की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी रिपोर्ट मांगी है.

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