स्कूली शिक्षकों को शालीन कपड़े पहनने का आदेश

फाइल फोटो
Image caption तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षकों को ऐसे कपड़े नहीं पहनना चाहिए जिसका बच्चों पर बुरा असर पड़े

तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा विभाग ने एक परिपत्र जारी करके स्कूली शिक्षकों से कहा है कि वे शालीन कपड़ों में आएं जो उनके पेशे और संस्कृति से मेल खाते हों.

इसमें कहा गया है कि शिक्षकों को कपड़े ऐसे नहीं होने चाहिए जो समानता को बढ़ावा देते हों और छात्रों को फुसलाते न हों.

चेन्नई स्थित वरिष्ठ पत्रकार केवी लक्ष्मणन ने बीबीसी को बताया कि रजनीकांत और दूसरी फिल्मी हस्तियों के तौर-तरीकों का बच्चों पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु सरकार ने पिछले साल भी एक परिपत्र जारी किया था.

'ड्रेस कोड होना अच्छी बात'

उनसे जब पूछा गया कि क्या तमिलनाडु के स्कूलों में शिक्षिकाओं के स्कर्ट या तंग कपड़े पहनने की वजह से कोई विवाद पैदा हुआ है तो उन्होंने कहा कि ये आदेश सिर्फ महिला शिक्षकों के लिए नहीं है, ये पुरुष शिक्षकों पर भी उतना ही लागू होता है.

उन्होंने बताया कि इस परिपत्र में कुछ-कुछ कमियां रही होंगी, इस वजह से इस साल स्कूली सत्र की शुरुआत में ही फिर से परिपत्र जारी करके स्कूलों से कहा गया है कि वे शिक्षकों का शालीन परिधान सुनिश्चित करें.

उन्होंने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने इसे 'यूनिफॉर्म' के तौर पर लागू नहीं किया है, लेकिन संस्कृति का हवाला देते हुए ये जरूर कहा गया है कि शिक्षक ऐसे कपड़े न पहने जिनका बच्चों पर बुरा असर पड़ता हो.

तमिलनाडु स्नातक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सतीश अम्बुजाद का कहना है कि शिक्षकों के लिए ड्रेस-कोड होना अच्छी बात है और ये अनिवार्य भी होना चाहिए.

वे इसकी वजह बताते हैं कि बच्चे अपने शिक्षक का अनुसरण करते हैं, ये ऐसा है जैसे शिक्षक ओरिज़नल कॉपी है तो बच्चे उसकी ज़ेरॉक्स कॉपी होते हैं.

वे इस कदम का स्वागत करते हुए कहते हैं कि ओरिज़नल कॉपी यदि अच्छी नहीं होगी तो ज़ेरॉक्स कॉपी का खराब निकलना तय है.

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