कैंसर की कहानी, युवराज की जुबानी

  • 11 जुलाई 2012
Image caption युवराज अपने अनुभव के बारे में कैंसर पर किताब लिख रहे हैं.

भारत के स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह कैंसर की बीमारी के अपने अनुभव पर किताब लिखने रहे हैं. किताब का नाम होगा - ‘इन डिफरेंट फॉर्म,’ जो साल के अंत तक बाजार में उपलब्ध होगी.

युवराज सिंह कहते हैं, “मैं जब इस बारे में सोचता हूं तो मुझे लगता है कि मेरे जीवन में अंग्रेजी के ‘सी’ शब्द की काफी अहम भूमिका रही है. मैं चंडीगढ़ में पैदा हुआ, मैं क्रिकेटर बना, दुनिया भर में एक क्रिकेटर के रुप में अपनी टीम के साथ कप के लिए लालायित रहा. अब अंग्रेजी का एक नया सी शब्द फिर से मेरी जिन्दगी में जुड़ गया है, जिसका नाम कैंसर है. यह किताब उसी कैंसर के बारे में है.”

विश्वकप का जिक्र

किताब में युवराज सिंह 2011 के विश्व कप जीतने और उसके बाद की कहानी बताएगें. वो इसमें यह भी बताएगें कि विश्व कप के मैच के दौरान उन्हें किन-किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था और उन्हें कैसे बीमारी की चिंता हो रही थी.

युवराज किताब में ये भी बताएगें कि फाइनल मैच से पहले की रात उन्होंने ईश्वर से कैसे दुआ मांगी थी कि उनकी टीम को विश्व कप जीता दें, और उसके बदले में भगवान जो चाहे, ले लें.

युवराज अपनी किताब में बताएगें कि कैसे विश्व कप मैच की खुमारी में ही उन्हें कैंसर का पता चला था. साथ ही, वो ये भी बताएगें कि जब उनका कीमोथैरापी हो रहा था तो उनके भीतर कौन-कौन सी भवानाएं हिलोरे ले रही थीं.

सच्ची होगी किताब

युवराज कीमोथैरापी के दौरान होनेवाली अपनी पीड़ा, दुख, लगातार क्षीण हो रही उर्जा और हां, बढ़ते गंजेपन के बारे में भी वो इस किताब में जिक्र करेंगें.

वो ये भी बताएगें कि जब वो हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे तो उन्हें क्या डर लगता था और उदासी, अकेलापन से बचने के लिए, कैसे इलाज करा रहे लोगों बातें करते थे.

उनका कहना है कि उनकी किताब ‘इन डिफरेंट फॉर्म’ लाइंस आर्म्सस्ट्रांग की किताब ‘इट्स नॉट द बाईक’ की तरह काफी ईमानदारी से लिखी गई होगी. यह किताब एक खिलाड़ी के विजय यात्रा के बारे में नहीं होगी बल्कि बीमारी के दौरान चल रही अपनी जिंदगी के बारे में होगी.

युवराज कहते हैं कि विश्व कप से लेकर कैंसर होने के समय के बाद तक उन्होंने बहुत कुछ सीखा है. टीम में एक खिलाड़ी के रूप में उनकी इच्छा होती थी कि उन्होंने जो गलतियां की है और उससे जो कुछ भी मैंने सीखा है, उसके बारे में अपने सहयोगियों को बताएं और उन्हें आगाह करें.

निजी अनुभव भी

वो कहते हैं कि कैंसर होने के बाद उन्हें पता लगा कि भारत में कितने कैंसर पीड़ित हैं.

युवराज कहते हैं, "मैं कल्पना करता हूं कि उनमें से बहुत से लोग अकेला महसूस कर रहे होगें, हक्का-बक्का रह गए होगें या फिर घबरा गए होगें. इसलिए उनसे मैं अपनी बीमारी के दौरान जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव के बारे में बताना चाहता हूं. मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि वो अकेला महसूस न करें बल्कि मैं भी अब उनके ही टीम का हिस्सा मानता हूं."

अंग्रेजी में लिखी युवराज सिंह की किताब ‘इन डिफरेंट फॉर्म’ दिसम्बर में प्रकाशित होगी जिसे रैंडम हाउस इंडिया छाप रही है.

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