खाप, प्रेम-विवाह और प्रतिबंध

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Image caption उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई इलाक़ों में प्रेम विवाह को लेकर नाराज़गी रहती है.

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की एक खाप पंचायत ने अपने तुगलकी फरमान में कहा है कि 40 साल के कम उम्र की महिलाएं बाजार नहीं जा सकती है और लड़कियां मोबाइल फोन पर बात नहीं कर सकतीं.

खाप पंचायत ने प्रेम विवाह पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि जिन्होंने प्रेम विवाह कर लिया है, वो सार्वजनिक रूप से नजर न आए वरना उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.

असार ग्राम की खाप पंचायत ने बुधवार को ये फरमान सुनाया था. खाप का कहना है कि गांव में छेड़छाड़ और प्रेम विवाह के मामले बढ़ रहे थे, इसलिए ये फरमान सुनाया गया है.

'जिनके घर में मर्द नहीं वो क्या करें'

Image caption खाप पंचायत अध्यक्ष मोहकम पहलवान कहते हैं कि फरमान न मानने वालों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे

खाप पंचायत के फरमान पर गांव के लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है. कुछ लोगों का कहना है कि गांव की फिज़ा सही रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है. वहीं कुछ लोग इसके विरोध में भी आवाज उठा रहे हैं.

स्थानीय निवासी अफसाना कहती हैं, ''ये सरासर गलत फरमान सुनाया गया है जो नसीहतें दी गई हैं, उन्हें धमकी भरे लहजे में कहने की कोई जरूरत नहीं थी. जिनके घर में मर्द नहीं हैं, वो औरतें तो बाजार जाएंगी ही और अपना काम करेंगी ही. जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री एक महिला हो सकती है तो महिलाओं पर इस तरह की पाबंदी क्यों.''

'फरमान जारी करने वाली ही छेड़छाड़ को शह देते हैं'

गांव की एक अन्य महिला वसीला कहती हैं, ''ये फरमान गैरवाजिब है क्योंकि अगर मुझे कुछ काम है और मेरे घर में अगर कोई पुरुष नहीं है तो मुझे ही बाजार जाना होगा. जोर-जबर्दस्ती के साथ औरतों को बाजार जाने से रोकना बिल्कुल ठीक नहीं है और ये फरमान जारी करने वाले वही लोग हैं जिनकी शह पर गांव में छेड़खानी होती है.''

लेकिन खाप पंचायत के अध्यक्ष मोहकम पहलवान कहते हैं, ''जो फरमान सुनाया गया, वो बिल्कुल सही है. लड़कियां बाजार जाती हैं और वहां उनके साथ छेड़छाड़ होती है, इसलिए हमने कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं ही बाजार जाएं.''

Image caption वसीला कहती हैं कि फरमान सुनाने वालों की ही शह पर छेड़छाड़ होती है

वे कहते हैं, ''प्रेम-विवाह करने वाले ज्यादातर लोग गांव से बाहर हैं, उनका वहीं रहना सही है, गांव आने पर उनका लोगों पर बुरा असर पड़ता है. गांव के लड़के-लड़कियां फोन पर बात करते हैं. ये हमारे संस्कार के खिलाफ है, इसलिए हमने इसकी भी मनाही की है.''

कहा गया है कि प्रेम विवाह करने वालों को गांव में रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

पुलिस का रुख

बागपत जिले के पुलिस अधीक्षक वीएस शेखर ने कहा है कि उन्हें भी पंचायत से इस तरह के हुक्मनामा जारी होने की खबर मिली है और उन्होंने जिला खुफिया विभाग से इसकी जांच करने को कहा है.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई भी कदम खुफिया विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही उठाया जाएगा.

भद्र कपड़े पहनने का आदेश

इससे पहले हरियाणा में 'महिलाओं की सुरक्षा के लिए' राज्य के महिला और बाल विभाग ने एक सरकारी आदेश के तहत कर्मचारियों को 'भद्र कपड़ों पहनकर' दफ्तर आने को कहा था.

विभाग की तरफ से जारी सर्कुलर में भारतीय पोशाक को भद्र कपड़े माना गया था. हालाँकि कर्मचारियों, विशेष तौर पर महिला कर्मचारियों की दृष्टि से पश्चिमी पोशाक जैसे टी-शर्ट, टॉप, जीन्स आदि को विभाग 'भद्र कपड़े' नहीं माना गया था.

शिक्षक शालीन कपड़े पहनें

हाल ही में तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा विभाग ने एक परिपत्र जारी करके स्कूली शिक्षकों से कहा है कि वे शालीन कपड़ों में आएं जो उनके पेशे और संस्कृति से मेल खाते हों.

इसमें कहा गया है कि शिक्षकों को कपड़े ऐसे नहीं होने चाहिए जो समानता को बढ़ावा देते हों और छात्रों को फुसलाते न हों.

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