बथानी टोला नरसंहार मामले में अपील मंज़ूर

Image caption बथानी टोला नरसंहार के अभियुक्तों को बरी किए जाने के बाद पटना में विरोध हुआ था

सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के बिहार के बथानी टोला नरसंहार मामले में 23 अभियुक्तों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को स्वीकार कर लिया है.

बिहार सरकार और नरसंहार में मारे गए लोगों के एक संबंधी ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के विरूद्ध अपील की थी जिसे सर्वोच्च अदालत ने मंज़ूर कर लिया.

हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल को फ़ैसला सुनाते हुए इस नरसंहार में अभियुक्त 23 लोगों में से तीन को निचली अदालत से मिली मौत की सज़ा और 20 अन्य को मिली उम्रक़ैद की सज़ा को खारिज कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों, अल्तमस कबीर और जे चेलामेश्वर की पीठ ने फैसले के विरूद्ध की गई अपील को स्वीकार करते हुए बरी किए गए सभी 23 लोगों को नोटिस जारी कर दिया है.

अदालत ने साथ ही कहा है कि इस मामले की त्वरित सुनवाई होनी ज़रूरी है.

ये नरसंहार 11 जुलाई 1996 को बिहार के भोजपुर ज़िले के सहर ब्लॉक के अंतर्गत आनेवाले गाँव बथानी टोला में हुआ था.

इसमें रणवीर सेना नामक उच्च जातियों के एक ग़ैर क़ानूनी गुट के लोगों ने 21 दलितों की हत्या कर दी थी.

भोजपुर की एक अदालत ने मई 2011 में बथानी टोला नरसंहार कांड में 23 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन को फाँसी और 20 को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार की ओर से अपील करनेवाले वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार और अधिवक्ता अभिनव मुखर्जी ने कहा कि बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद सभी संबंधित दस्तावेज़ों को हासिल करने के उपरांत अपील दायर की थी.

नरसंहार में अपनी पत्नी और दो बेटियों को खोनेवाले बथानी टोला निवासी किशुन चौधरी ने भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी.

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