छत्तीसगढ़ 'मुठभेड़ के गवाह' हैदराबाद में गिरफ्तार

फर्जी मुठभेड़ के विरोध में
Image caption हैदराबाद में कवि वरा वरा राव और अन्य नागरिक कार्यकर्ताओं ने फर्जी मुठभेड़ों पर बैठक की

छत्तीसगढ़ के बासागुडा इलाके में हाल ही में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल यानि सीआरपीएफ़ के हाथों मारे गए लोगों के 18 रिश्तेदारों और आंध्र प्रदेश सिविल लिबर्टीज़ समिति के दो नेताओं को अदालत में पेश किया गया है.

इन्हें सोमवार को पुलिस ने हैदराबाद में गिरफ्तार किया था.

इन में से दो नेताओं नारायण राव और हौमंथ राव को अदालत ने दो सप्ताह के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है जबकि 11 नाबालिगों को बच्चों की जेल में भेज दिया गया है.

अदालत ने पुलिस से कहा है की वो इनके माता-पिता का पता लगाकर इन बच्चों को उनके हवाले कर दे ताकि वो माओवादी संगठनों के हाथों में न पड जाएं.

पुलिस का कहना था की ये सभी लोग माओवादियों के समर्थक और उनसे सहानभूति रखने वाले लोग थे जो माओवादी विचारधारा फैलाने के लिए हैदराबाद आये थे.

'ये गवाह है'

पुलिस के अनुसार ये लोग हैदराबाद में होने वाली "शहीदों के सम्बन्धियों और मित्रों के संगठन" की बैठक में भाग लेने के लिए हैदराबाद आए थे.

लेकिन क्रांतिकारी लोकतांत्रिक मोर्चे के नेता वरा वरा राव और आंध्र प्रदेश सिविल लिबर्टीज़ समिति ने कहा कि ये लोग छत्तीसगढ़ में 28 जून को सीआरपीएफ के हाथों हुए नरसंहार का शिकार होने वालों के रिश्तेदार या उस घटना के गवाह हैं.

वरा वरा राव ने बीबीसी से कहा कि ये लोग सोमवार की सुबह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से हैदराबाद पहुंचे और पुलिस ने इन्हें हैदराबाद के बस अड्डे पर अपनी हिरासत में ले लिया. और अब इन्हें माओवादियों के समर्थक बताते हुए अदालत में पेश किया गया है.

राव ने कहा कि पुलिस इन लोगों से इसलिए डरी हुई है क्योंकि ये लोग छत्तीसगढ़ में हुए नरसंहार के गवाह हैं. उनके अनुसार उस घटना के लिए आंध्र की पुलिस भी जिम्मेदार है क्योंकि उसी ने सीआरपीएफ को गलत सूचना दी थी और उसी के कारण निर्दोष नागरिक उस घटना में मारे गए.

वरा वरा राव ने कहा की ये लोग क्रांतिकारी लेखकों के संघ "विरसम" की बैठक में हिस्सा लेने के लिए हैदराबाद आए थे और यहाँ से वो रायपुर जाने वाले थे जहां मंगलवार को डेमोक्रेटिक राइट्स संगठन की और से नरसंहार की घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था.

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