ममता बनर्जी का यू टर्न: अब प्रणब मुखर्जी को समर्थन

  • 17 जुलाई 2012
ममता बनर्जी इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से मिलने के बाद प्रणब मुखर्जी के खिलाफ़ तीन नाम सुझाए थे

केंद्र में सत्तारुढ़ गठबंधन यूपीए में शामिल तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने आखिरकार ये घोषणा कर दी है कि वे राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देंगीं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले मतदान के ठीक दो दिन पहले अपने पहले के निर्णय को नाटकीय रुप से पलटा है.

इससे पहले वे प्रणब मुखर्जी के खिलाफ़ थीं और उनकी उम्मीदवारी का विरोध करते हुए उन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर अपनी ओर से मनमोहन सिंह, एपीजे अब्दुल कलाम और सोमनाथ चटर्जी का नाम लिया था.

ये और बात है कि दो ही दिनों में मुलायम सिंह यादव ने ममता बनर्जी का दामन छोड़ दिया था और मनमोहन सिंह, एपीजे अब्दुल कलाम और सोमनाथ चटर्जी तीनों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था.

हालांकि कांग्रेस ने ममता बनर्जी को मनाने की कोशिशें जारी रखीं थीं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ख़ुद प्रणब मुखर्जी ने उनसे समर्थन देने का औपचारिक अनुरोध किया था.

दो दिन पहले ही प्रणब मुखर्जी ने ममता बनर्जी को समर्थन मांगने के लिए एक पत्र लिखा था जिसे ममता बनर्जी ने फेसबुक पर जारी कर दिया था.

'कोई विकल्प नहीं था'

ममता बनर्जी ने कोलकाता में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का चुनाव देश का सबसे बड़ा चुनाव है और हम अपना मत बेकार में नहीं जाने देना चाहते इसलिए हमने प्रणब मुखर्जी को समर्थन करने का फ़ैसला किया है.

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी एपीजे अब्दुल कलाम को समर्थन देना चाहती थी लेकिन उन्हें कई राजनीतिक दलों का समर्थन नहीं मिल सका.

तृणमूल कांग्रेस यूपीए की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है जिसके लोकसभा में 19 सांसद हैं और राज्यसभा में नौ.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी पर इस बात पार्टी के भीतर और बाहर दोनों से इस बात का दबाव था कि वे राष्ट्रपति बनने जा रहे पहले बंगाली के रास्ते में रोड़ा खड़ा करके पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएँ आहत न करें.

पार्टी नेताओँ से चर्चा के बाद ममता बनर्जी ने कहा, "प्रणब दा बंगाल से हैं लेकिन हमने ये निर्णय लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की वजह से लिया है."

उनका कहना था, "हमने ये निर्णय पीड़ा के साथ लिया है. ये दिल से लिया हुआ निर्णय नहीं है. हमने ये निर्णय बिना किसी उकसावे और बिना किसी आर्थिक लेनदेन के लिया है."

तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा कि एक विकल्प ये था कि वे चुनाव में हिस्सा ही नहीं लेते लेकिन वे अपना वोट बेकार नहीं जाने देना चाहते थे.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे एक बार फिर वोट देने का अनुरोध किया इसके बाद उन्होंने ये फ़ैसला लिया.

आगे निकले प्रणब

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption प्रणब मुखर्जी को यूपीए के बाहर के कई दलों का समर्थन हासिल है

ममता बनर्जी का समर्थन मिल जाने के बाद प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद की दौड़ में अपने प्रतिद्वंद्वी पीए संगमा से आगे निकल गए दिखते हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के इस निर्णय के साथ ही प्रणब मुखर्जी के पास इलेक्टोरल कॉलेज के कुल 11 लाख मतों में से सात लाख मत दिखते हैं.

उनके पास यूपीए के सहयोगी दलों के अलावा सीपीएम और फॉर्वर्ड ब्लॉक का समर्थन है और एनडीए के दो घटक दल जनता दल यू और शिवसेना भी उन्हें समर्थन दे रहे हैं.

माना जा रहा था कि वे पश्चिम बंगाल के लिए विशेष आर्थिक पैकेज चाहती थीं जिसके लिए वित्तमंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी ने इनकार कर दिया था और इसी से ममता बनर्जी नाराज़ थीं.

जब सरकार ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश को 45 हज़ार करोड़ का विशेष पैकेज देने की घोषणा की गई तो इसे समाजवादी पार्टी को राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए का साथ देने के एवज में तोहफ़े के रूप में देखा गया.

संबंधित समाचार