बहरीन: सालों से फंसे भारतीय मजदूरों की घर वापसी

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Image caption इन मजदूरों की भारत वापसी के लिए ऑनलाइन याचिका पर 20000 लोगों ने दस्तखत किए थे.

बहरीन में छह साल से फंसे क़रीब 100 भारतीय मज़दूरों को आख़िरकार भारत वापस आने की इजाज़त मिल गई है. ऐसा बहरीन में भारत के दूतवास और कंस्ट्रक्शन कंपनी नास कॉर्पोरेशन के बीच हुए एक समझौते के बाद हुआ है.

इन कामगारों को कानूनी कारणों से बहरीन छोड़ने की अनुमति नहीं मिल रही थी क्यों इन मजदूरों ने अपने कॉन्ट्रेक्ट को तोड़ते हुए इस कंपनी का साथ छोड़ दिया था.

समझौते के बाद कंपनी इन मजदूरों के खिलाफ दायर अपने मुक़दमे को वापस ले लेगी. कंपनी ने इन लोगों के खिलाफ "काम से गायब " होने का आरोप लगाया था.

आत्महत्या के बाद ऑनलाइन याचिका

इन मजदूरों की भारत वापसी के लिए ऑनलाइन याचिका पर 20,000 लोगों ने दस्तखत किए थे.

इस याचिका को पिछले महीने आवाज नाम के संगठन के जरिए बहरीन में फंसे मजदूरों में से एक के भाई ने शुरू किया था.

तमिलनाडू के रहने वाले शंकर मरिअप्पन का दावा है कि बहरीन में फंसे मजदूरों में से एक उनके पशुपति मरिअप्पन भी थे जिन्होंने एक सार्वजनिक पार्क में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने बीबीसी को बताया, " बहरीन में भारतीय दूतावास और नास के बीच में अनुबंध हो गया है जिसके चलते 100 भारतीय मजदूर घर वापस जा सकते हैं." सैयद अकबरुद्दीन के अनुसार यह मामला पिछले काफ़ी दिनों से लटक रहा था.

दूसरी तरफ़ नास कॉरपोरेशन ने कहा है कि वह "सद्भावना" के चलते उठाए गए एक कदम के तहत सभी मामले वापस ले रही है. कंपनी केवल उन्ही मामलों को वापस नहीं लेगी जहाँ मजदूर किसी तरह की आपराधिक कार्रवाई में शामिल हों.

मजदूरों की रिहाई के लिए कोशिश कर रहे संगठन आवाज ने मजदूरों की रिहाई के मामले को उन 20000 लोगों के जीत बताया है जिन्होंने इन मजदूरों की रिहाई के लिए ऑनलाइन याचिका पर दस्तख़त किए थे.

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