सोनिया से मुलाकात के बाद पवार हुए नरम

  • 20 जुलाई 2012
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Image caption मीडिया में शरद पवार के इस्तीफा देने की अटकलें थीं.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में पिछले आठ साल से सहयोगी रही राष्ट्रवादी कांग्रेस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि कुछ मुद्दों पर उसके कांग्रेस के साथ मतभेद हैं.

हालाँकि एनसीपी प्रमुख शरद पवार की नाराजगी के चलते यूपीए सरकार पर मंडरा रहा संकट खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन कमजोर जरूर पड़ गया है.

एनसीपी ने साफ कर दिया है कि दोनों दलों के संबंधों में कुछ दिक्कतें जरूर हैं. लेकिन वो यूपीए सरकार का अभिन्न अंग है और कांग्रेस के साथ मिलकर 2014 का चुनाव लड़ेगी.

दरअसल राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए गए प्रणब मुखर्जी के सरकार से अलग हो जाने के बाद इस बात को लेकर बहस तेज हो गई कि सरकार में नंबर दो अब कौन होगा.

ये बहस उस वक्त शुरू हुई जब प्रणब मुखर्जी के इस्तीफे के बाद पहली बार हुई मंत्रिमंडल की बैठक मे शरद पवार को प्रणब वाली सीट मिली लेकिन हफ्ते भार बाद मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक में प्रणब वाली सीट पर रक्षा मंत्री और कांग्रेस नेता एके एंटनी को बिठा दिया गया.

मीडिया की खबरों के अनुसार शरद पवार मानते हैं कि यूपीए में प्रणब मुखर्जी के बाद वो सबसे वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए जो हैसियत मनमोहन सरकार में प्रणब को दी गई थी, उसके पहले हकदार वह खुद हैं.

गठबंधन की दुहाई

गुरुवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शरद पवार से फोन पर बात की और उसके बाद रात में उनकी मुलाकात हुई. शुक्रवार सुबह सोनिया गांधी और शरद पवार की मुलाकात हुई. इस मुलाकात के बाद शरद पवार के तेवर नरम पड़ गए.

मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के कुछ नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि नंबर दो का मुद्दा बेवजह उछाला जा रहा है. पवार का कद इस पद से काफी ऊंचा है. लेकिन गठबंधन सरकार चलाने के लिए कई मुद्दों का हल निकलना जरूरी है.

उन्होंने बताया कि पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दोनों के सामने ये मुद्दे रखे हैं. हालांकि आगे की रणनीति तय करने के लिए एनसीपी की बैठक सोमवार को होगी.

इससे पहले, मीडिया में खबरें थीं कि कृषि मंत्री पवार और भारी उद्योग मंत्री पटेल ने अपने इस्तीफे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास भेज दिए हैं. पर प्रफुल्ल पटेल नें इन खबरों का खंडन किया.

सरकार के 'भरोसेमंद' साथी

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Image caption प्रफुल्ल पटेल ने साफ कहा है कि गठबंधन चलाने के तौर तरीकों पर मतभेद हैं.

प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि नंबर दो बनना कोई मुद्दा नही है, बल्कि एनसीपी, कांग्रेस के गठबंधन चलाने के तौर-तरीके से नाराज है.

एनसीपी नेता के अनुसार कई महीने पहले ही पार्टी में इसकी चर्चा की जा चुकी थी, पर राष्ट्रपति चुनावों के चलते मतदान होने तक का इंतजार किया गया और जब मतदान खत्म हुआ तो उन्होंने अपनी चिंताओं से प्रधानमंत्री को अवगत करा दिया.

वैसे यूपीए के लिए शरद पवार भरोसेमंद साथी रहे हैं और उनकी पार्टी ने प्रत्यक्ष विदेश निवेश के मुद्दे पर सरकार का खुलकर साथ दिया है. वो आर्थिक सुधारों के पक्ष में रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस का खुलकर साथ दिया.

एनसीपी के लोकसभा में नौ सदस्य हैं. पार्टी पिछले आठ वर्षों से यूपीए की पिछली सरकार और वर्तमान सरकार दोनों में प्रमुख सहयोगी रही है.

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