कोलकाता में जुटे 40 देशों के यौनकर्मी

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Image caption संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया भर में लगभग 3.4 करोड़ लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं

अमरीका में हो रहे यौनकर्मियों के सम्मेलन में जाने की इजाजत न मिल पाने के बाद, कोलकाता में शनिवार से दुनिया के 40 से अधिक देशों के लगभग 500 यौनकर्मी एड्स पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कर रहे हैं.

अमरीका की राजधानी वांशिगटन में भी आज इसी विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन हो रहा है. अमरीका का वीजा न मिल पाने के बाद कोलकाता में ये समानान्तर सम्मेलन हो रहा है. ये छह दिन तक चलेगा.

सम्मेलन की आयोजक संस्था ‘दरबार महिला समन्वय समिति’ के सदस्य डॉक्टर समरजीत जाना ने बीबीसी को बताया, "दुनिया भर के यौनकर्मियों ने सोचा कि उनका खुद का एक सम्मेलन होना चाहिए. फिर उन्हें लगा कि यह सम्मेलन ऐसे देश में होना चाहिए जहां किसी तरह की बंदिश न हो. इस सम्मेलन में यौनकर्मियों के बीच एड्स के फैलाव को कम करने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी."

इस सम्मेलन में यौनकर्मियों के अधिकारों और उनके साथ होने वाले भेदभाव पर भी विचार विमर्श किया जाएगा.

कोलकाता का रेडलाइट एरिया सोनागाछी की एक यौनकर्मी भारती ने कहा, “यौनकर्मियों को उनके अधिकार मिलने चाहिएं. हम पिछले 20 साल से अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं. 2006 में हमने संसद तक मार्च किया था. अब हम मिल कर राष्ट्रीय अभियान शुरु करने जा रहे हैं.”

एड्स से मौतों में कमी

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया भर के 3.4 करोड़ लोग एचआईवी से ग्रस्त है. इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी की अगले हफ्ते होने वाली सालाना बैठक से ठीक पहले जारी की गई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार एड्स संबंधित बीमारियों से मरने वालों की संख्या में कमी आई है.

वर्ष 2010 में करीब 18 लाख लोग एड्स से मरे थे. 2011 में यह संख्या 17 लाख थी. हालांकि 2005 में करीब 25 लाख लोग मारे गए थे. यह कमी एचआईवी के ग्रस्त लोगों के बेहतर इलाज के कारण आई है.

'अमरीका का ढोंग'

अमरीका के इस रुख पर ग्लोबल नेटवर्क आफ सेक्स वर्क प्रोजेक्टस के अध्यक्ष एंड्रयु हंटर ने कहा, “ अमरीका एड्स को रोकने और इसके शिकार मरीजों के इलाज के लिए ‘एंटी-रेट्रोवायरल’(एआरवी) दवाएं मुहैया करवाने के लिए सबसे ज्यादा राशि देता है. लेकिन इंटरनेशनल एड्स कॉन्फ्रेंस में यौनकर्मियों की हिस्सेदारी या विश्व स्तर पर एड्स को नियंत्रित करने में इनकी भूमिका की बात आती है तो अमरीका का पाखंड सामने आ जाता है.”

उन्होंने कहा, “ हम एचआईवी का खात्मा कर सकते हैं. हमारे पास उपाय हैं. हम जानते हैं कि एआरवी इलाज एड्स को फैलने से रोकता है. इसके लिए हमें पैसा और एक व्यापक कार्यक्रम चाहिए.

इसके लिए यौनकर्मियों की हिस्सेदारी काफी अहम है. लेकिन अमरीका में ही एचआईवी के खात्में के लिए हमें अपनी भूमिका निभाने नहीं दी जा रही है.”

कोलकाता सम्मेलन के फायदे

डॉक्टर समरजीत जाना ने कहा, “ मेरा मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तीन तरह के लोगों के ज्ञान और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा. एक, शोधकर्ता, कार्यक्रम तैयार करने वाले, अधिकारी और नीति निर्धारक होंगे. दूसरे जो एचआईवी से संक्रमित और प्रभावित हुए हो और तीसरे वो जो कि एचआईवी की चपेट में जल्द आने की संभावना वाले लोग हैं. इनमें यौनकर्मी, इंजेक्शन से नशा लेने वाले और विपरीतलिंगी शामिल हैं. ”

उन्होंने इस सम्मेलन की इजाजत के लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने पूरी दुनिया से सामने एक उदहारण पेश किया है.

डॉक्टर समरजीत जाना ने कहा, “ भारत सरकार ने दिखाया है कि यौनकर्मियों को उनके अधिकार और उन्हें अपने से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की इजाजत दे कर एचआईवी रोकथाम कार्यक्रमों में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. ”

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