प्रणब मुखर्जी होंगे नए राष्ट्रपति

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भारत में राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी ने अपने निकटतम उम्मीदवार पीए संगमा को हरा दिया है.

पिछले चार दशकों से देश की राजनीति में सक्रिय रहे प्रणब मुखर्जी देश के तेरहवें राष्ट्रपति होंगे.

चूंकि पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद दो बार राष्ट्रपति रहे इसलिए वे इस पद पर आसीन होने वाले बारहवें व्यक्ति होंगे.

राष्ट्रपति के रूप में वे 25 जुलाई को शपथ लेंगे.

वर्तमान राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है.

जीत के बाद प्रणब मुखर्जी ने मतदान करने वाले सभी चुनाव मंडलों को धन्यवाद दिया और देश की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया.

इससे पहले उनके प्रतिद्वंद्वी पीए संगमा ने अपनी हार स्वीकार करते हुए प्रणब मुखर्जी को बधाई दी. लेकिन उन्होंने चुनाव के दौरान केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

बधाइयों का सिलसिला

राष्ट्रपति चुनाव में जीत की ख़बरों के बाद प्रणब मुखर्जी के निवास पर बधाई देने वाले नेताओं के पहुँचने का सिलसिला शुरु हो गया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी पत्नी गुरुशरण कौर के साथ 13, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पहुँचे तो यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी अपने बेटे और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के साथ वहाँ पहुँचीं.

लोकसभा की अध्यक्ष मीरा कुमार भी नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को बधाई देने पहुँचीं.

रक्षा मंत्री एके एंटनी और गृहमंत्री पी चिंदबरम पहले ही वहाँ पहुँच गए थे.

उनके घर के बाहर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ जमा हो गई थी और वहाँ ढोल नगाड़े बज रहे थे.

कर्नाटक में क्रॉस वोटिंग

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Image caption संगमा को चुनाव लड़ने के लिए अपनी पार्टी एनसीपी से इस्तीफ़ा देना पड़ा

नियमानुसार राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के अलावा राज्य विधानसभाओं के सदस्य भी मतदान करते हैं.

इस तरह कुल 4,896 मतदाताओं में से 776 सांसद और 4,120 विधायकों को अपने मतों का प्रयोग करना होता है.

गुरुवार को हुए मतदान में इस बार 95 प्रतिशत मतदान हुआ था.

मतगणना की शुरुआत में नियमानुसार संसद भवन में हुई मतगणना की मतपेटियाँ पहले खोली गईं.

मुलायम सिंह सहित कुल 15 सांसदों के मत विभिन्न वजहों से खारिज कर दिए गए.

शेष 748 मतों में से 527 मत प्रणब मुखर्जी तो मिले जबकि पीए संगमा को 206 मत मिले.

बाद में राज्यों की मतपेटियाँ खुलने के बाद भी प्रणब मुखर्जी की बढ़त का सिलसिला जारी रहा.

राज्यों की मतपेटियाँ खुलीं तो वैसे ही परिणाम आए जैसा कि अपेक्षित था.

भाजपा शासित राज्यों गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और गोवा में पीए संगमा को अधिक वोट मिले.

लेकिन कर्नाटक में भाजपा की सरकार होने के बावजूद वहाँ से प्रणब मुखर्जी को अधिक वोट मिले. वहाँ से यूपीए ने 102 मतों की उम्मीद लगा रखी थी क्योंकि एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल एस ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा की थी लेकिन उसे मिले 117 वोट.

मतगणना के अनुसार कुल 10,29,750 मूल्य के वैध मत पड़े जिसमें से 76 वर्षीय प्रणब मुखर्जी को 7,13,763 मत मिले जो कुल मतों का 69.3 प्रतिशत मत हैं.

पीए संगमा को 3,15, 987 मत ही मिल सके.

शुरु से पलड़ा था भारी

नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रणब मुखर्जी यूपीए के अधिकृत उम्मीदवार घोषित किए गए थे.

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Image caption प्रणब मुखर्जी केंद्र सरकार के सबसे अनुभवी मंत्रियों में से एक थे

कांग्रेस के बाद यूपीए के सबसे बड़े घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने से इनकार कर दिया था और अपनी ओर से पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आगे किया था.

लेकिन पिछले हफ़्ते वो भी साथ आ गईं और प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने का फ़ैसला किया.

इसके अलावा प्रणब मुखर्जी को समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी का समर्थन मिला हुआ था.

वाममोर्चे के दो घटक दलों सीपीएम और फॉर्वर्ड ब्लॉक ने प्रणब मुखर्जी को वोट दिया, जबकि सीपीआई और आरएसपी ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया.

प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों, जनता दल यूनाइटेड और शिवसेना ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन दिया.

दूसरी ओर पीए संगमा को प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने समर्थन देने की घोषणा की और उनके साथ एनडीए की कुछ और पार्टियाँ थीं.

हालांकि पीए संगमा को उम्मीद थी कि आदिवासी होने के नाते उन्हें यूपीए की ओर से भी बहुत से मत मिलेंगे, ज़ाहिर है कि ऐसा हुआ नहीं.

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