असम:हिंसा में 17 लोगों की मौत

  • 23 जुलाई 2012
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Image caption असम के कोकराझार ज़िले में जातीय हिंसा की वजह से हज़ारों लोगों ने अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण ली है.

दक्षिण असम के कोकराझार और चिरांग ज़िलों में जातीय हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 17 हो गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट्स (बीटीएडी) के पुलिस महानिदेशक एसएन सिंह के हवाले से बताया है कि जिन हिंसा-प्रभावित इलाकों में रात्रि कर्फ्यू लगाया गया था, वहां से किसी नई घटना की ख़बर नहीं है.

पुलिस का कहना है कि हिंसा के चलते हज़ारों लोग अपने घरों को छोड़कर भाग रहे हैं.

कोकराझार ज़िले में अधिकारियों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि हिंसा प्रभावित इलाकों से लगभग 50 हज़ार लोग अपने घर छोड़कर नज़दीक के राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं.

अधिकारी का कहना था कि विस्थापित लोगों के लिए 37 शिविर लगाए जा चुके हैं और अगर ज़रूरत पड़ी तो और शिविर भी खोले जाएंगे.

हिंसा की वजह

पीटीआई के मुताबिक गुरुवार को कोकराझार ज़िले में मुस्लिम समुदाय के दो छात्र नेताओं पर अज्ञात लोगों ने गोली चलाई. जवाबी हमले में बोडो लिबरेशन टाइगर्स संगठन के चार पूर्व सदस्य मारे गए.

इसके बाद फैली हिंसा कोकराझार में 12 और चिरांग में पांच लोग मारे गए.

पुलिस का कहना था कि चिरांग ज़िले के हसारो बाज़ार इलाके में अज्ञात लोगों ने रविवार शाम को तीन लोगों को मार दिया और इसी ज़िले के बिजनी शहर में एक गिरोह ने दो लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी.

इस बीच रविवार को ही कोकराझार में एक डीआईजी और तीन अन्य लोग भीड़ के हमले में घायल हो गए.

उधर हिंसा को फैलने से रोकने के लिए कोकराझार में रात्रि कर्फ्यू जारी है और पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की मदद के लिए सेना बुला ली गई है.

स्थिति का जायज़ा लेने के लिए सोमवार को असम के वन मंत्री रकीबुल हुसैन और खाद्य और आपूर्ति मंत्री नज़रूल इस्लाम कोकराझार पहुंचे जहां उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों को नज़रअंदाज़ करने की अपील की.

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