टीम अन्ना के अनशन के बीच प्रणब लेंगे शपथ

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Image caption प्रणब मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे

राजधानी दिल्ली में बुधवार को दो प्रमुख घटनाओं के चलते काफ़ी सरगर्मी रहने वाली है.

एक तरफ़ लोकतंत्र के सर्वोच्च पद पर प्रणब मुखर्जी पदासीन होंगे तो वहीं दूसरी ओर उसी लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ उठाने जंतर-मंतर पर टीम अन्ना का अनशन शुरू हो रहा है.

भारत के मुख्य न्यायाधीस एसएच कपाड़िया प्रणब को साढ़े ग्यारह बजे शपथ दिलाएँगे. माना जा रहा है उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की प्रमुख सोनिया गाँधी के अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल रह सकती हैं.

सुबह मुखर्जी शपथ ग्रहण से पहले राजघाट जाएँगे. उधर जनलोकपाल लाने के लिए संघर्ष कर रहे अन्ना हज़ारे भी दिल्ली में अनशन पर बैठने से पहले राजघाट जाते रहे हैं और भले ही वह इस बार के अनशन में 29 जुलाई से बैठने की घोषणा कर चुके हों मगर अनशन कर रहे अन्य साथियों का हौसला बढ़ाने जंतर-मंतर जाने से पहले अन्ना के भी राजघाट जाने की संभावना है.

राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी यूपीए के उम्मीदवार थे और उन्होंने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवार पीए संगमा को बड़े अंतर से <span > हराया था. मगर अब उम्मीद की जाएगी कि राष्ट्रपति भवन पहुँचने के बाद मुखर्जी निष्पक्ष होकर काम करेंगे.

मुखर्जी निशाने पर

Image caption अन्ना हज़ारे ने चार दिन बाद अनशन पर बैठने की बात कही है

वैसे उनकी लंबी राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते राजनीतिक प्रेक्षकों की उनके कार्यकाल में काफ़ी दिलचस्पी है. माना जा रहा है कि प्रणब मुखर्जी के पास जितना राजनीतिक और वैधानिक अनुभव है उसके बाद वह केवल रबर स्टैंप राष्ट्रपति नहीं बन रहेंगे.

सबसे अहम 2014 में होने वाला राष्ट्रपति चुनाव होगा क्योंकि अगर उस चुनाव में किसी एक गठबंधन को बहुमत नहीं मिलता है तो उस सूरत में राष्ट्रपति की भूमिका काफ़ी अहम होगी.

इधर मजबूत लोकपाल की माँग कर रही टीम अन्ना के निशाने पर इस बार प्रणब मुखर्जी भी होंगे. दरअसल टीम अन्ना ने प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के 14 अन्य मंत्रियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनकी जाँच कराने की माँग की थी.

सरकार ये माँग ठुकरा चुकी है. टीम अन्ना ने जिन मंत्रियों के नाम उस सूची में शामिल किए थे उनमें प्रणब मुखर्जी का भी नाम था. ऐसे में टीम अन्ना उनके राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी नाराज़गी जता रही है.

बुधवार से अन्ना हजारे खुद अनशन पर नहीं बैठ रहे हैं बल्कि टीम अन्ना के अन्य सदस्यों के अनशन पर बैठने की संभावना है. मंगलवार शाम अन्ना हजारे ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि वह इस बारे में चार दिनों तक सरकार का रुख़ देखने के बाद जरूरत होने पर 29 जुलाई से अनशन पर बैठेंगे.

उनका ये भी कहना था कि इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी.

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