अनशन पर अन्ना हजारे, सरकार खामोश

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Image caption अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक के मामले पर सरकार पर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया है.

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर आमरण अनशन शुरु किया है, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि उनके देशवासी उन्हें मरने नहीं देंगे.

अन्ना हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और गोपाल राय समेत सैकड़ों लोग 25 जुलाई से ही अनशन पर है.

अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों की मांग है कि उनके द्वारा तैयार किए गए ढर्रे पर जनलोकपाल विधेयक संसद में जल्द से जल्द पारित किया जाए और साथ ही उनके द्वारा चिन्हित किए गए 15 कथित तौर पर ‘भ्रष्ट’ नेताओं के खिलाफ विशेष दल से जांच कराई की जाए.

टीम अन्ना की तरफ से सौंपी गई कथित तौर पर ‘भ्रष्ट’ मंत्रियों की सूची में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी नाम शामिल है.

हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.

लोगों से शक्ति

रविवार को जंतर-मंतर पर इकठ्ठा हजारों लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा, “मुझे विश्वास है कि मेरे देश के लोग मुझे मरने नहीं देंगे. मुझे आप लोगों से शक्ति मिलती है.”

पिछले साल अगस्त में अन्ना हजारे भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों की आवाज बनकर उभरे थे. हालांकि इस बार वो पहले की तरह भीड़ खींचने में अब तक कामयाब नहीं हो पाएं हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि टीम अन्ना के किसी एक मांग पर टिके नहीं होने के कारण अभियान को नुकसान पहुंचा है. साथ ही अपनी शर्तों पर लोकपाल विधेयक पारित कराने की जिद्द से भी अभियान को नुकसान पहुंचा है.

अन्ना हजारे के आंदोलन को शुरुआती दौर में काफी सहयोग दे चुका मीडिया भी इस बार पहले के मुकाबले खामोश है.

अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक संपादकीय में कहा गया, “अन्ना और इन्के साथियों को ये बात याद रखनी चाहिए की वो सिर्फ सरकार पर एक दबाव बनाने वाली ताकत है. वो संसद के काम काज का निर्धारण नहीं कर सकते. उनका काम भ्रष्टाचार के मुद्दों को जीवंत रखना है.”

राजनीतिक एजेंडा

अन्ना और उनके सहयोगियों की ओर से प्रधानमंत्री और कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को कई विशेषज्ञ एक राजनीतिक एजेंडे के तौर पर देख रहे हैं.

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Image caption डॉक्टरों ने अन्ना हजारे को अनशन नहीं करने की सलाह दी है.

हालांकि समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार रविवार को जंतर-मंतर पर इकठ्ठा हुए अन्ना के समर्थकों ने ये मानने से इनकार किया है कि आंदोलन कमजोर पड़ा है.

एएफपी के अनुसार, जंतर-मंतर पर अन्ना के अभियान में शरीक होने आए पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर 26 वर्षीय मितुल राना ने कहा, “इस आंदोलन का अंदाजा सिर्फ भीड़ से नहीं लागाया जाना चाहिए. सच और सत्य पर चलना ही आंदोलन की शक्ति है.”

अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ जंतर-मंतर पर आई कौशल्या देवी ने कहा, “अन्ना हजारे हमारे लिए अनशन पर बैठे हैं, ये हमारा कर्तव्य है कि हम उनका समर्थन करें.”

उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा अन्ना हजारे के बारे में जाने क्योंकि मै उन्हें एक सच्चा नेता मानती हूं. देश का नेता बनने वालो का सच्चा चेहरा लोगों के सामने लाया जाना चाहिए.”

इससे पहले अन्ना हजारे ने कांग्रेस और बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि इन दोनो पार्टियों के हाथों में भारत ‘सुरक्षित नहीं हैं’. हालांकि उन्होंने कहा कि वो चुनावों में साफ छवि वाले लोगों का समर्थन करेंगे.

अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक के मामले पर सरकार पर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया है.

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