गुजरात दंगे: दीपड़ा दरवाजा मामले में 22 दोषी करार

  • 30 जुलाई 2012
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Image caption गुजरात दंगो के दौरान कई जगह लोगों की हत्याएँ कर दी गई थीं

गुजरात के मेहसाणा में एक विशेष अदालत ने वर्ष 2002 में हुए दीपड़ा दरवाज़ा दंगों के एक मांमले में 22 लोगों को दोषी ठहराया है.

गोधरा में एक ट्रेन पर हुए हमंलों के बाद भड़के दंगों के बाद इस घटना में दंगाइयों ने एक ही परिवार के 11 लोगों की हत्या कर दी थी.

इन लोगों पर हत्या और आपराधिक षडयंत्र के गंभीर आरोप लगाए गए थे.

विशेष अदालत के एससी श्रीवास्तव ने 83 अभियुक्तों में से 63 को बरी कर दिया है. बरी होने वालों में भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद गोसा और स्थानीय नगर निगम के प्रमुख दयाभाई पटेल शामिल हैं.

अदालत ने जिन 22 लोगों को दोषी ठहराया है, उनमें से 21 पर हत्या और दंगों के आरोप हैं जबकि विसनगर इलाक़े के पुलिस इंस्पेक्टर एमके पटेल पर ड्यूटी में लापरवाही का दोषी पाया गया है.

जिन 63 लोगों को बरी किया गया है, उनमें से 10 के ख़िलाफ़ कोई आरोप साबित नहीं हो सके, जबकि शेष लोगों को संदेह लाभ देकर छोड़ा गया है.

28 फ़रवरी, 2002 को मेहसाणा के विसनगर के दीपड़ा दरवाज़ा इलाक़े में दो बच्चों और 65 वर्ष की एक महिला सहित 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी.

इस मामले में जिन लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किए गए थे, उनमें तीन महिलाएँ भी थीं लेकिन उन्हें बरी कर दिया गया है.

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