बेटे को यातना पर दस साल की कैद

Image caption सजा सुनाए जाने के बाद भी शौर्य काफी डरा हुआ है

दिल्ली की एक अदालत ने 13 वर्षीय शौर्य बल्हारा की हत्या की कोशिश और यातना देने के अभियोग में उनके पिता सेना के पूर्व मेजर ललित और उनकी सौतेली माँ प्रीती को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है.

शौर्य और उसकी नानी सावित्री ने इस सजा पर संतोष तो व्यक्त किया, लेकिन कहा कि ऐसे लोगो को उम्र कैद होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि वो इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी.

शौर्य को जब सजा का बताया गया तो उसने आसमान निहारा और अपनी लड़खडाती जबान में कहा,"वो मुझे फिर पकड लेगा. वो जेल से बाहर आकर मुझे उठा लेगा. वो मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा."

एक बेटा जो चाहता है माँ-बाप का सत्यानाश

शौर्य की करुण कहानी

शौर्य वर्ष 1999 में पैदा हुआ. मगर उसे माँ का सुख नहीं मिला. क्योंकि जल्द ही माँ मिनाक्षी का निधन हो गया और पिता ललित ने प्रीती से दूसरी शादी कर ली.

वर्ष 2002 में कीटनाशक पीने या पिलाने से उसकी हालत बिगड़ गई और उसे सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया.

इसके बाद ननिहाल पक्ष ने शौर्य की परवरिश हाथ में ली तो पता चला उस नन्ही सी जान पर बेतहाशा अत्याचार किए गए हैं.

वीडियो देखे:अब ऐसे बोलता है शौर्य

सावित्री का कहना है,"ये सजा कम है. आप देखिये शौर्य लगभग पूरी तरह अपाहिज है. ये उम्र उसके पढने लिखने, खेलने और अपने जैसे बालकों में रमने की होती है. वो कैसे कठिन दौर से गुजरा रहा है. उसके भविष्य का क्या होगा. हम चाहते है ऐसे अमानवीय कृत्य करने वालो को ठीक सजा मिले ताकि आइन्दा कोई ऐसी हिमाकत ना करे."

उम्रदराज सावित्री जब कभी शौर्य में अपनी दिवगंत बेटी मिनाक्षी की छवि देखती है तो भावुक हो जाती है.

वो कहती है शौर्य कई बार रात में उठ जाता है और कहने लगता है वो मुझे मार देंगे. शौर्य के बाल मन की दीवार पर अपने ही पिता के उस पर नाजिल जुल्मो सितम की कहानी दर्ज है.

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