बाघों की मौत में एक तिहाई की बढ़ोतरी

बाघ इमेज कॉपीरइट AP
Image caption बाघों की मौत का एक कारण अवैध रुप से शिकार बताया जा रहा है

भारत में बाघों की मौत को लेकर आए ताज़ा आकड़ो पर संरक्षणवादियों ने चिंता जताई है. आकड़ो के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल के छह महीनों में बाघों की मौत की संख्या में एक तिहाई बढो़तरी हुई है.

अब तक 46 बाघों के मारे जाने की रिपोर्टें हैं. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के एक प्रवक्ता का कहना है कि जिस तरह से बाघों की मौत में बढ़ोतरी हुई है ये सबका ध्यान आकर्षित करने वाला हैं.

इन बाघों की मौत के कई कारण बताए जा रहे है इनमें से व्यावसायिक कारणों के लिए किया गया अवैध शिकार और अप्राकृतिक मौत कारण मुख्य है.

इसके अलावा अन्य कारण भी है लेकिन उनके बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं पता चल पा रहा है.

अवैध शिकार

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था में प्रजाति और भूदृष्य विभाग के निदेशक डॉ दीपांकर घोष ने बीबीसी की सुशीला सिंह को बताया, ''बाघों की मौत के दो कारण है. एक तो अवैध व्यापार के लिए उनका शिकार होता है वहीं दूसरा बदले की कार्रवाई में उन्हें मार दिया जाता है. हालांकि व्यवसाय के लिए बाघों का इस्तेमाल भारत में तो नहीं होता लेकिन चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में इसका निर्यात होता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापारी भी इससे जुड़े हुए हैं.''

हाल के सालों में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है और इसका मुख्य कारण बाघों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों को बताया जा रहा है.

लेकिन डॉ दीपांकर घोष का कहना है बाघों की घटती संख्या को कम करने के लिए टाइगर रिज़र्व में जितनी सुरक्षा दी जाती है उतनी ही जंगली इलाकों या बाहरी इलाकों में भी दी जानी चाहिए.

उनका कहना था, '' रिज़र्व फोरेस्ट साथ ही टाइगर रिज़र्व में फोरेस्ट गार्ड के कई स्थान रिक्त है जिन्हें भरा जाना चाहिए. फ्रंट लाइन स्टॉफ की संख्या को बढ़ाया जाना चाहिए. नई भर्ती के अलावा सेना या पुलिस को जिस तरह से लड़ाई लड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है वो दिया जाना चाहिए और शिकारी भी कई आधुनिक हथियार इस्तेमाल करते है जिनसे लड़ने की रणनीति भी बनानी चाहिए.''

हालांकि बाघों की संख्या को लेकर आए ताज़ा आकड़ो ने चिंता को बढ़ाई है लेकिन वर्ष 2010-2011 की गणना के अनुसार फिलहाल बाघों की संख्या 1706 गिनी गई है.

संबंधित समाचार