क्या होगा सर से जुड़ी बहनों का?

  • 13 अगस्त 2012
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

रमज़ान का महीना है और पटना के समनपुर के मोहल्ले में खुशी का माहौल है, लेकिन सबा और फरहा के घर में अजीब सी उदासी छाई हुई है.

कभी-कभी ये उदासी उनके चेहरों से छलककर उनकी बातों में आ जाती है.

पटना के निम्न मध्यमवर्गीय मोहल्ले समनपुर के एक साधारण घर में रहने वाली इन 15 वर्षीय बहनों के सिर जन्म से ही आपस में जुड़े हुए हैं.

उनके घर में सब जानते हैं कि दोनों का भविष्य अधर में है.

डॉक्टर कहते हैं कि अगर ऑपरेशन के ज़रिए दोनों को अलग किया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है.

इसी डर की वजह से दोनों के माता-पिता ने ऑपरेशन से इंकार कर दिया है.

सबा और फरहा की दयनीय हालत को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उनके इलाज के लिए दिल्ली लाने का आदेश दिया है.

लेकिन उनकी माँ राबिया खातून ने बीबीसी से कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं लेकिन अगर ऑपरेशन होता है तो बच्चों की जान खतरे में पड़ जाएगी.”

परिवार की मांग है कि उन्हें मासिक भत्ता मिले और सरकार पटना में ही बच्चों का इलाज करवाए.

शारीरिक दिक्कत

दोनो बहनों के सिर की महत्वपूर्ण नसें आपस में जुड़ी हुई है और सबा फरहा के शरीर में मौजूद दो गुर्दों की बदौलत जिंदा हैं.

सबा के शरीर में कोई गुर्दा नहीं है.

जब एक बहन को दर्द होता है तो दूसरी भी उसे महसूस कर सकती है.

कपड़े पहनने से लेकर, भोजन करना या फिर शौचालय जाना जैसे कामों को करना उनके लिए कितना मुश्किल है, इसे समझना आसान नहीं है.

वक्त के साथ उनका जीवन मुश्किल हो चला है. पहले सलमान खान के गाने गुनगुनाने वाली सबा-फरहा अब कम बात करती हैं.

फरहा ने कहा, “हमारे पूरे शरीर में दर्द रहता है. और क्या कहें? कोई हमारी मदद के लिए भी नहीं आता है. हम अलग नहीं होना चाहतीं. हम साथ-साथ रहना चाहतीं हैं.”

'झूठे वायदे'

सबा और फरहा के घर पहुँचने के लिए समनपुर मोहल्ले की एक गली के अंत में लगे नीले लोहे के दरवाजे को पार करके आपको सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं.

छत को टीन से ढक कर किसी तरह दो कमरे निकाले गए हैं. बड़े कमरे में गैस, खाने का सामान, पानी और तख्त रखा हुआ है.

बड़े कमरे से सटे हुए छोटे कमरे में सबा-फरहा हमारा इंतजार कर रही थीं. सिर एक दूसरे से सटे हुए थे, और वो अलग-अलग दिशाओं में देख रही थीं.

कमरे में दो से ज्यादा लोगों के खड़े होने की जगह नहीं थी.

बरसात के मौसम में 10 लोगों का परिवार इसी कमरे में किसी तरह से खुद को पानी से बचाता है क्योंकि बाहर के कमरे में पानी भर जाता है.

कुछ वक्त पहले फिल्म एक्टर सलमान खान ने उन्हें अपने घर बुलाया था और राखी बंधवाई. बदले में उन्हें 50,000 रुपए दिए.

परिवार के मुताबिक सलमान ने उनसे भविष्य में मदद का वायदा किया, लेकिन कई कोशिशों के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो सका.

सबा-फरहा को पढ़ने के अलावा टीवी औऱ गाने का शौक है. सबा बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है और फरहा अध्यापक.

खुशी के मायने

Image caption डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी के मुताबिक कोशिश होनी चाहिए कि बच्चों के जीवन के स्तर में सुधार हो

दर्द के बावजूद रमजान के दौरान उनके शौक में कमी नहीं आई है. माँ रबिया खातून बताती हैं कि दोनों को अच्छे, महंगे कपड़े पहनना बहुत पसंद है.

और उनका इकलौता भाई तमन्ना उनकी सभी खुशियों का ध्यान रखता है.

वो गर्व से कहती हैं, “भाई हमको जान से ज्यादा मानते हैं.”

हालाँकि महँगे कपड़ों का जिक्र होने पर फरहा थोड़ा शर्माते हुए कहती हैं वो सस्ते कपड़े भी पहन लेंगी.

दो सालों से इन बच्चों का इलाज कर रहे स्थानीय डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी को भी आशंका है कि अगर ऑपरेशन हुआ तो उनकी बचना मुश्किल है.

वो कहते हैं, “हाल ही में जब इनकी तबीयत खराब हुई, तबसे उन्हें लगने लगा कि कुछ भी हो सकता है. इस कारण इन बच्चियों में निराशा बढ़ी है.”

नाराज़गी

जब हम घर पहुँचे तो सबा-फरहा के अलावा पाँच बहनें, भाई तमन्ना और माँ-बाप बेहद नाराज थे. बहुत कोशिशों के बाद ही वो बातचीत के लिए तैयार हुईं.

माँ राबिया खातून ने गुस्से में कहा, “आप लोग कैमरा लेकर आ जाते हैं, लेकिन हमें कोई मदद नहीं मिलती.”

राबिया कहती हैं, “मिलने वाले पैसे से बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो पाएँगे. हमारी जिंदगी का तो कोई ठिकाना है नहीं.”

ये कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू आ गए.

वो कहती हैं, “मोहल्लेवालों को लगता है कि हमें मदद में लाखों, करोड़ों रुपए मिले हैं. लेकिन सलमान से 50,000 रुपए के अलावा किसी से कोई मदद नहीं मिली है.”

उन्होंने बच्चों की देखभाल के लिए राज्य सरकार से 30,000 रुपए तक के मासिक भत्ते की मांग की है.

बीबीसी ने बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी.

भविष्य

तो ऐसे में आखिर इन बच्चियों का भविष्य क्या है?

डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी कहते हैं, “यदि उनके खाने का अच्छा ख्याल रखा जाए, उनकी डॉक्टरी जाँच होती रहे और उनकी रूचियों को बढ़ावा दिया जाए, तो उनकी जिंदगी में सुधार आ सकता है.”

डॉक्टर तेजस्वी आगे कहते हैं, “जितनी मुश्किलों के बावजूद ये बच्चियाँ अपना जीवन जी रही हैं, हो सकता है कि ईश्वर उन्हें लंबा जीवन दे.”

किसी अजनबी के घर में आने से सबा और फरहा के परिवार को अब कोई उम्मीद नहीं बँधती.

उन्हें लगता है कि सिर से जुड़ी दो बहनें बाहरी दुनिया के लिए उत्सुकता और कौतूहल का विषय तो हैं, लेकिन उन्हें इस स्थिति से निकालने का रास्ता किसी के पास नहीं हैं.

दोनों बच्चियों की माँ राबिया खातून आखिर में सिर्फ एक वाक्य कह कर चुप हो गईं - “आप भी चले जाएँगे और कुछ नहीं करेंगे.”

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