अंबेडकर स्टेडियम में रुके रामदेव समर्थकों के साथ

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दिल्ली पुलिस ने योगगुरु रामदेव और उनके समर्थकों को देर शाम रिहा करने का ऐलान किया मगर उसके बावजूद रामदेव और उनके समर्थकों ने स्टेडियम से जाने से इनकार कर दिया है.

रामदेव को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली पुलिस अंबेडकर स्टेडियम ले गई और रामदेव के समर्थक भी बड़ी तादाद में वहाँ पहुँच गए.

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें रिहा करने की घोषणा की मगर रामदेव ने अपने समर्थकों के लिए पानी और खाने की माँग करते हुए स्टेडियम से जाने से इनकार कर दिया.

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रामदेव ने उस मौक़े पर समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "आप लोग भूखे-रहें या प्यासे रहें इस सरकार को उसकी कोई चिंता नहीं है. गिरफ़्तार करने के बाद सरकार ने हमें इस अस्थाई जेल में रखा. क़ानून और नैतिकता की दृष्टि से यहाँ मौजूद लोगों को खाना और पानी देने की ज़िम्मेदारी सरकार की है."

इससे पहले विदेशों में जमा काला धन भारत लाने की माँग कर रहे रामदेव को संसद की ओर मार्च करते समय हिरासत में लिया गया था. रामदेव के साथ बड़ी तादाद में उनके समर्थक भी मौजूद थे.

उन्हें संसद की ओर जाते समय दिल्ली के रंजीत सिंह फ़्लाईओवर के पास गिरफ़्तार किया गया.

इस पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान रामदेव ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की मगर उन्हें जिस बस में पुलिस ने बैठाया था, उनके समर्थक उसे आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे.

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी रामलीला मैदान पहुँचे थे जहाँ उन्होंने रामदेव के आंदोलन को समर्थन दिया.

उनके साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के समन्वयक और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव भी थे.

'कांग्रेस हटाओ'

ये दोनों नेता रामलीला मैदान भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े ग्यारह बजे पहुँचे और रामदेव के साथ मंच पर बैठे.

विपक्षी गठबंधन के इन नेताओं की वहाँ मौजूदगी को राजनीतिक दृष्टि से काफ़ी अहम माना जा रहा है क्योंकि रामदेव ने खुले तौर पर कांग्रेस नेतृत्त्व वाली सरकार को हटाने का आह्वान किया है.

रामदेव ने समर्थकों की नारेबाज़ी के बीच कहा, "कांग्रेस हटाओ, देश बचाओ."

उन्होंने सोमवार सुबह अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "लोकसभा चुनाव 2014 में होना है और 99 प्रतिशत संभावना तो 2013 में ही चुनाव हो जाने की है. ये विरोध प्रदर्शन इसलिए है कि कोई भी बेईमान व्यक्ति संसद न पहुँच सके. ऐसे लोगों को बहिष्कार होना चाहिए. हमारा कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है."

योगगुरु रामदेव ने रामलीला मैदान में नौ अगस्त से आंदोलन शुरू करते हुए सरकार को तीन दिन का समय दिया था.

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