'अन्ना-रामदेव नहीं होते तो कोई और होता'

 मंगलवार, 14 अगस्त, 2012 को 03:47 IST तक के समाचार

रामदेव ने पिछले साल भी आंदोलन किया था लेकिन तब पुलिस ने समर्थको को मार भगाया था.

योग गुरु बाबा रामदेव अपने समर्थकों के साथ दिल्ली के अंबेडकर स्टेडियम में हैं और उन्होंने कहा है कि वो स्टेडियम से ही अपनी अगली रणनीति की घोषणा करेंगे.

क्लिक करें रामदेव और उनके समर्थकों को संसद की तरफ कूच करते हुए रोक दिया गया था और अंबेडकर स्टेडियम ले जाया गया था.

पहले क्लिक करें अन्ना हज़ारे का जंतर मंतर पर अनशन और फिर रामदेव का आंदोलन यानी देश में लगातार सरकार के ख़िलाफ कोई न कोई आंदोलन चल ही रहा है.

क्लिक करें अन्ना-रामदेव आंदोलन: कब और किससे हुई 'चूक'?

जानी मानी पत्रकार और विश्लेषक नीरजा चौधरी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि मुद्दा अन्ना और रामदेव नहीं हैं बल्कि भ्रष्टाचार है.

नीरजा चौधरी

"सबसे बड़ी बात ये है कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से मंहगाई बढ़ी हैं उससे एक कनेक्शन बना है लोगों में. मंहगाई के ख़िलाफ़ गुस्सा भ्रष्टाचार के ख़िलाफ गुस्से में तब्दील हो गया है"

वो कहती हैं, ‘‘ अगर अन्ना या रामदेव नहीं होते तो कोई और होता भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतीक बन जाता. शहरी मध्यम वर्ग में भ्रष्टाचार इतना बड़ा मुद्दा बन गया है कि कोई भी आवाज़ उठा रहा है तो लोग उनके साथ हो जा रहे हैं.’’

लेकिन क्या अन्ना टीम के टूटने का नुकसान मुद्दे को नहीं हुआ है और रामदेव तो पिछली बार भाग गए थे.

नीरजा कहती हैं, ‘‘पिछली बार रामदेव भागे थे लेकिन इस बार उन्होंने अपनी क्रेडिबिलिटी बना ली है. इसमें कोई शक नहीं. कांग्रेस विरोधी दल ही नहीं बल्कि सरकार को समर्थन करने वाले दल भी उनके मंच पर आए तो एक ध्रुवीकरण तो हो रहा है कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ.’’

नीरजा कहती हैं कि लोग क्लिक करें भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हो गए हैं.

वो कहती हैं, ‘‘ सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अब तक सिविल सोसायटी वाले व्यवस्था परिवर्तन की बात करते थे. अब सत्ता परिवर्तन की बात आई है. हर सरकार में भ्रष्टाचार होता है. हर पार्टी में भ्रष्टाचार है लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से मंहगाई बढ़ी हैं उससे एक कनेक्शन बना है लोगों में. मंहगाई के ख़िलाफ़ गुस्सा भ्रष्टाचार के ख़िलाफ गुस्से में तब्दील हो गया है.’’

नीरजा कहती हैं कि या तो सरकार को समझ में नहीं आ रहा है या फिर वो समझना नहीं चाहती है कि जनता मंहगाई से बुरी तरह त्रस्त है और इसी कारण वो सड़कों पर उतर रही है.

लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति पर नज़र रखने वाली नीरजा कहती हैं कि कांग्रेस पार्टी जनता के मन की बात को तूल नहीं दे रही है जो उनके लिए घातक साबित हो सकता है.

तो फिर रात भर स्टेडियम में बैठे रामदेव की आगे की रणनीति क्या हो सकती है. नीरजा कहती हैं कि ये सवाल मुश्किल है लेकिन मुद्दा रामदेव या अन्ना से आगे का है और ये बात सरकार के लिए समझना बहुत ज़रुरी है.

रामदेव का आंदोलन

बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में तीन दिन अनशन के बाद सोमवार को संसद जाने का ऐलान किया था और दोपहर में संसद की तरफ निकल पड़े थे.

उन्हें रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया और अंबेडकर स्टेडियम ले जाया गया था.

रामदेव अपने समर्थकों के साथ अभी भी अंबेडकर स्टेडियम में मौजूद हैं.

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें रिहा करने की घोषणा की मगर रामदेव ने अपने समर्थकों के लिए पानी और खाने की माँग करते हुए स्टेडियम से जाने से इनकार कर दिया.

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