कराची की नन्हीं खदीजा को भारत का तोहफा

 मंगलवार, 14 अगस्त, 2012 को 18:47 IST तक के समाचार
खदीजा

भारतीय संस्था की मदद के बाद जल्द ही सुन व बोल सकेगी पाकिस्तान से आई खदीजा

कराची से आई 20 महीने की खदीजा के लिए भारत और पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस इस वर्ष विकलांगता से आज़ादी का संदेश लेकर आया है.

खदीजा जन्म से ही गूंगी और बहरी है लेकिन अब वह बहुत जल्द सुनने और बोलने लगेगी क्योंकि हैदराबाद के एक अस्पताल में उसे इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एक बड़ी सर्जरी होने वाली है.

इस सर्जरी में उसके शरीर के अन्दर कॉक्लीअर इम्प्लांट नामक एक उपकरण लगाया जाएगा.

खास बात यह है की इस उपकरण की लागत दस लाख रुपए है. हैदराबाद की एक ग़ैर सरकारी संस्था "सही" (सोसाइटी टु एड हियरिंग इम्पेर्ड) ने इस पाकिस्तानी बच्ची को यह उपकरण मुफ्त उपलब्ध करवाया है.

खदीजा के पिता अदनान अदील ने कहा की वह केवल अस्पताल का खर्च उठा रहे हैं. अदनान एक इंजीनियर हैं.

'भारत का आभारी'

अदनान ने बीबीसी को बताया, "मैं अपनी बच्ची के लिए कॉक्लीयर इम्प्लांट लगवाने के लिए इंटरनेट पर किसी अस्पताल की खोज कर रहा था और उस दौरान मेरा संपर्क हैदराबाद की इस संस्था 'सही' से भी हुआ. केवल यही एक संस्था थी जो हमारी मदद के लिए आगे आई. मैं संस्था का और भारत के सभी लोगों का बहुत ही आभारी हूँ".

"मैं अपनी बच्ची के लिए काक्लीयर इम्प्लांट लगवाने के लिए इंटरनेट पर किसी अस्पताल की खोज कर रहा था और उस दौरान मेरा संपर्क हैदराबाद की इस संस्था 'सही' से भी हुआ. केवल यही एक संस्था थी जो हमारी मदद के लिए आगे आई. मैं संस्था का और भारत के सभी लोगों का बहुत ही आभारी हूँ"

खदीजा के पिता अदनान

अपोलो अस्पताल में इस बच्ची की सर्जरी की तैयारी पूरी कर ली गई है. इस बीच अदनान ने पत्नी बानो के साथ मंगलवार को हैदराबाद में भारत और पाकिस्तान की आज़ादी के संयुक्त जश्न में हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम का आयोजन कन्फेडेरेशन आफ वालेंटरी ऐसोसिएशंस (कोवा) और कई दूसरे संगठनों ने मिलकर किया था.

इस अवसर पर अदनान ने कहा कि उन्हें भारत आने से पहले यह बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि यहाँ के लोग उनका इस तरह स्वागत करेंगे.

अदनान ने कहा, "यह भारत की मेरी पहली यात्रा है और यहाँ आने से पहले मुझसे यही कहा गया था कि जब मैं एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन काउंटर पर जाऊँगा तब ही मुझे मेरी औकात बात दी जाएगी. लेकिन उल्टा हमारे साथ यहाँ बहुत ही अच्छा व्यवहार किया गया. जैसा भारत को एक विरोधी देश के रूप में पेश किया जाता है, वैसी कोई बात हमें देखने को नहीं मिली".

खदीजा की माँ सहर बानो ने कहा, "भारत तो हमारे लिए एक ऐसा देश है जहाँ हमारी बच्ची को एक नया जीवन दान मिला है".

अदनान अदील का कहना था कि उनकी बच्ची को जो मदद मिली है, वह इस बात का नतीजा है कि अगर दोनों देशों के बीच दोस्ती होती है और दोनों करीब आते हैं तो इनके आम लोगों को कितना लाभ हो सकता है.

मोहब्बत का संदेश

""भारत तो हमारे लिए एक ऐसा देश है जहाँ हमारी बच्ची को एक नया जीवन दान मिला है"

मां बानो

उन्होंने कहा, "हमें आपस में जंग नहीं करना चाहिए, हमें तो बीमारों और गरीबी के विरुद्ध जंग करना चाहिए. मेरा कहना था कि इस तरह के आयोजन का मकसद ही यह है कि कैसे दोनों देशों और उनकी जनता को करीब लाया जाए. मैं यहाँ से अपने साथ दोस्ती और मोहब्बत का संदेश लेकर जा रहा हूँ."

ग़ैर सरकारी संस्था "सही" की सचिव सुनीता रेड्डी ने कहा कि दोस्ती की भावना को और मजबूत करने के लिए उनकी संस्था इस पाकिस्तानी बच्ची की सहिता के लिए आगे आई है.

रेड्डी ने कहा, "हम इस तरह के कई विकलांग बच्चों की मदद कर चुके हैं लेकिन यह पहली बार है कि पाकिस्तान की किसी बच्ची को इसका लाभ मिला है. हम इस पर बहुत खुश हैं."

भारत और पाकिस्तान की आज़ादी के दो दिवसीय संयुक्त समारोह का आयोजन करने वाले संगठन "कोवा" के निदेशक मजहर हुसैन का कहना है इसमें दोनों ही तरफ के ग़ैर सरकारी संगठन शामिल हैं."

इस समारोह के एक भाग के रूप में स्कूल और कालेजों के छात्रों के लिए अनेक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई थीं ताकि नई पीढ़ी में भी पाक-भारत दोस्ती की भावना को बढ़ावा दिया जाए.

जिस समय अन्दर यह समारोह चल रहा था, बाहर भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस और ऐसी ही दूसरी संस्थाओं के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.

विरोध करने वाले पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने का आरोप लगा रहे थे. लेकिन आयोजकों का कहना था की किसी भी देश का झंडा नहीं फहराया गया. जब प्रदर्शनकारियों ने समारोह के स्थान पर हल्ला बोलने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

यह दूसरी बार है जबकि हैदराबाद में किसी पाकिस्तानी बच्ची का इस तरह से इलाज किया जा रहा है. इससे पहले अक्टूबर 2004 में पाकिस्तानी बच्ची बतूल हसन का जिगर बदलने का आपरेशन हैदराबाद के ग्लोबल अस्पताल में हुआ था. अस्पताल ने वह आपरेशन मुफ्त में किया था और पाकिस्तानी परिवार को केवल दवाओं के ही पैसे देने पड़े थे.

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