15 अगस्त की कहानी माउंटबेटन की बेटी की जुबानी

 गुरुवार, 16 अगस्त, 2012 को 08:16 IST तक के समाचार
माउंटबेटन

18 अगस्त को लॉर्ड माउंटबेटन अपने परिवार और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के साथ

आज ऐसे बहुत ही कम लोग बचे हैं जो भारत की आजादी के करीबी गवाह रहे हैं. इनमें भारत के आखिरी वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन की बेटी पैमेला हिक्स का नाम भी शामिल है.

पैमेला हिक्स की उम्र 1947 में उस समय 18 साल थी. भारत की आजादी के 65 साल पूरे होने के मौके पर बीबीसी ने उनसे बात की.

पैमेला हिक्स ने बताया कि कैसे राजेंद्र प्रसाद ने कैबिनेट की सूची की जगह खाली कागज उनके पिता को थमाया था.

अफरातफरी का माहौल

पैमेला ने उस दिन का वाकया कुछ इस तरह सुनाया:

"मुझे याद है कि 14 अगस्त की शाम को राजन बाबू ( डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद) एक बहुत ही खूबसूरत लिफाफे के साथ मेरे पिता से मिलने आए. वह लिफाफा उन्होंने मेरे पिता को सौंप दिया और कहा कि यह हमारे पहले कैबिनेट मंत्रियों की सूची है.

"इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में जब हम पहुंचे तो हजारों लोग वहां थे. मैं कार से उतरी. लोगों का हुजुम परेशान कर देने वाला था. पंडित नेहरु ने हमें देखा और हाथ हिला कर मंच पर आने का इशारा किया. लेकिन भीड़ इतनी थी कि संभव नहीं था"

पोमेला हिक्स

मेरे पिता ने खोलकर देखा तो उस पर कुछ नहीं लिखा था. जाहिर था कि उस दिन ऐसी अफरा-तफरी थी कि राजन बाबू कैबिनेट की लिस्ट की जगह खाली पन्ना ही लेकर आ गए थे.

मैं उस दिन दिए पंडित नेहरु के भाषण को नहीं भूल सकती. उन्होंने सभी को हिला देने वाले अंदाज से शुरुआत की थी.

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में जब हम पहुंचे तो हजारों लोग वहां थे. मैं कार से उतरी. लोगों का हुजुम परेशान कर देने वाला था. पंडित नेहरु ने हमें देखा और हाथ हिला कर मंच पर आने का इशारा किया. लेकिन भीड़ इतनी थी कि संभव नहीं था.

पंडित नेहरु काफी दूरी तय करके आए और मुझ से कहा, आ जाओ और पहले अपने जूते उतारो. इसके बाद उन्होंने मुझे भीड़ के ऊपर से खींच लिया. सभी लोग ये देखकर हंसने लगे थे.

जिन्ना के चेहरे पर चमक

इससे पहले मैं अपने पिता और मां के साथ 13 अगस्त को कराची पहुंचे थे. मैं काफी हैरान हुई क्योंकि जैसे ही हमारा विमान एयरपोर्ट पर उतरा तो वहां भारी संख्या में हिंदू मौजूद थे.

जिन्नाह

हिक्स का कहना है कि कराची से विदाई पर जिन्ना का भावुक हो जाना वो कभी नहीं भूल पाएंगी.

सभी के हाथ में कांग्रेस पार्टी के झंडे थे. लेकिन अगले ही दिन उनकी जगह चांद वाले हरे झंडों ने ली थी.

अगला दिन पाकिस्तान के लिए आजादी का असली दिन था. वहां पर पाकिस्तान को सत्ता हस्तातंरण करने के लिए कार्यक्रम हुआ था.

जिन्ना के चेहरे पर कभी मुस्कुराहट नहीं रहती थी लेकिन हमने देखा कि गवर्मेंट हाउस में उस दिन उनके चेहरे पर चमक थी. वह मुस्कुरा कर मेरे पिता के साथ फोटो खिचवा रहे थे. लेकिन जब हम दिल्ली के लिए रवाना होने लगे, तो वह काफी भावुक हो गए.

वैसे मेरे पिता के साथ उनके मतभेद किसी से छिपे नहीं है लेकिन उस दिन जिन्ना ने सभी के सामने मेरे पिता के प्रति सम्मान और मित्रता जाहिर की. मैं जब भी उनकी आखिरी मुलाकात के बारे में सोचती हूं तो वो काफी असाधारण नजर आती है.

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