असम में फिर हिंसा, पांच की मौत

 शनिवार, 25 अगस्त, 2012 को 21:27 IST तक के समाचार
चिरांग ज़िला, असम

असम के चिरांग ज़िले में अब भी हज़ारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.

असम के चिरांग ज़िले में शनिवार को हुई ताज़ा हिंसा में पांच लोगों के मारे जाने की खबर है.

ये मौतें हिंसाग्रस्त चिरांग ज़िले के बिजनी कस्बे में हुईं जहां पुलिस ने अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है.

असम में कानून व्यवस्था के पुलिस महा निदेशक एल आर बिशनोई ने पीटीआई समाचार एजंसी को बताया कि इन लोगों की हत्या चाकू मारने से हुई औऱ घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं.

शनिवार को पांच लोगों की मौत के साथ असम में जारी हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 81 हो गई है.

बोडो आदिवासी समूहों और मुसलमानों के बीच छिड़ी हिंसा के कारण करीब पांच लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.

राज्य के कोकराझाड़, चिरांग और धुबरी ज़िले हिंसा के सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

खेत में मिली लाशें

"कुछ संदिग्ध लोगों ने इन पांच लोगों को दिन में मारकर फिर खेतों में उनके शव छुपा दिए."

एस एन सिंह, पुलिस महा निदेशक

'बोडोलैंड टेरिटोरियल एरियाज़ डिस्ट्रिक्ट' के पुलिस महा निदेशक एस एन सिंह ने आईएएनएस समाचार एजंसी को बताया कि स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर ही पुलिस मारे गए लोगों की लाशें ढूंढ पाई.

इन लोगों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है.

सिंह ने कहा, "कुछ संदिग्ध लोगों ने इन पांच लोगों को दिन में मारकर फिर खेतों में उनके शव छुपा दिए."

करीब एक महीना पहले असम में बोडो और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हिंसा भड़की जिसमें करीब 80 लोगों की मौत हो गई.

घर लौटना मुश्किल

बोडो आदिवासियों ने कोकराझाड़ और चिरांग में बने राहत शिविरों से अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया है, लेकिन धुबरी में अस्थायी शिविरों में रह रहे मुस्लिम अभी वहीं बने हुए हैं.

हालांकि असम सरकार के अनुसार कोकराझाड़ में राहत शिविरों की संख्या 90 से घटाकर 54 कर दी गई है.

कोकराझाड़ और चिरांग में राहत शिविरों में रह रहे लोगों की संख्या भी कम हुई है. जुलाई के अंतिम सप्ताह में वहां तीन लाख लोग रह रहे थे जिनकी संख्या अब घट कर एक लाख हो गई है.

बांग्लादेश से लगने वाले मुस्लिम बहुल धुबरी जिले में सरकार ने छह शिविर ही बंद किए हैं. वहां 133 शिविरों में अब भी डेढ़ लाख लोग रहे हैं. सिर्फ 29 हजार लोग ही वहां से अपने घरों को लौटे हैं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.