पटना के जैविक उद्यान में वृक्षों पर गिरी गाज

 शनिवार, 25 अगस्त, 2012 को 10:33 IST तक के समाचार
पटना का जैविक उद्यान

पटना शहर का फेफड़ा माना जाने वाला बायोलॉजिकल पार्क यानी 'संजय गाँधी जैविक उद्यान' ख़ुद सांस नहीं ले पाने जैसे संकट से घिरता जा रहा है.

कहने को तो यह एक चिड़ियाघर है, लेकिन 153 एकड़ क्षेत्र में दो सौ प्रजातियों के लगभग 10 हज़ार बड़े-बड़े छायादार वृक्ष ही इसकी जान और शान हैं.

लेकिन पिछले दो-तीन हफ़्तों में इस उद्यान के छह सौ से अधिक वृक्षों के सिर क़लम कर दिए गए हैं. अब वे टहनी-पत्तों के बिना ठूंठ की शक्ल में खड़े हैं.

कारण है कि इस बोटनिकल गार्डेन के ठीक सटे हुए पटना हवाई अड्डे पर विमान के उतरने या उड़ान भरने के समय इन वृक्षों की ऊँचाई को बाधक ठहराया गया था.

इसी सवाल पर छह साल पहले भी इस उद्यान के 249 पेड़ों की बेरहमी से कटाई-छंटाई कर दी गई थी. उसी समय से विमानों के परिचालन और हवाई अड्डा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने पेड़ काटने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था.

कहा गया कि इन ऊंचे पेड़ों की वजह से पटना में उपयोग के लायक विमान पट्टी बहुत छोटी पड़ गई है, इसलिए ख़तरा देखते हुए यहाँ से बड़े विमानों का परिचालन बंद हो सकता है.

बलि

इसलिए हवाई अड्डे का स्थानांतरण फ़िलहाल संभव नहीं होने के कारण यहाँ पर्यावरण के इन पहरुए वृक्षों की बलि ली जा रही है.

"जिस निर्ममता से यहाँ बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है, उससे तो यही लगता है कि पेड़ लगाकर पर्यावरण बचाने की सरकारी मुहिम एक ढोंग है. हवाई अड्डा कहीं और क्यों नहीं ले जाते हैं ये लोग? लगता है, जहाज से उड़ने वालों की सुविधा का सरकार को ज़्यादा ख़्याल है, इसलिए मुफ़्त में सबको ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों की यहाँ हत्या होने दी गई"

जैविक उद्यान में आए लोग

राज्य नागरिक उड्डयन विभाग के प्रधान सचिव रविकांत ने बीबीसी को बताया, ''ज़ू के अंदर और बाहर हवाई अड्डे के आस-पास सरकारी ज़मीन पर लगे लगभग एक हज़ार बड़े वृक्षों को काटा या छांटा जा चुका है. ये सूचना एयरपोर्ट से जुड़े केंद्रीय महकमों को दे दी गई है. फिर भी राज्य सरकार को साफ़-साफ़ कुछ भी नहीं बताना और पटना एयरपोर्ट पर तलवार लटकाए रखना दुखद है.''

उधर चिड़ियाखाना घूमने आने वाले दर्शक जब यहाँ बड़ी तादाद में कटे हुए पेड़ देखते हैं तो उनका रोष फूट पड़ता है.

ऐसे दर्शकों की एक टोली ने कहा, ''जिस निर्ममता से यहाँ बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है, उससे तो यही लगता है कि पेड़ लगाकर पर्यावरण बचाने की सरकारी मुहिम एक ढोंग है. हवाई अड्डा कहीं और क्यों नहीं ले जाते हैं ये लोग? लगता है, जहाज से उड़ने वालों की सुविधा का सरकार को ज़्यादा ख़्याल है, इसलिए मुफ़्त में सबको ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों की यहाँ हत्या होने दी गई.''

संजय गांधी जैविक उद्यान के निदेशक अभय कुमार अपने यहाँ वृक्षों के इस तरह क़त्लेआम संबंधी सवालों से बचने की कोशिश करते दिखे.

राहत

पटना का जैविक उद्यान

पिछले पाँच साल में इस जैविक उद्यान में 70 जानवरों की मौत हुई है

इसलिए उन्होंने उद्यान की कुछ ख़ास-ख़ास खूबियाँ गिनाईं, ''राईनो (गैंडा) के प्रजनन और संरक्षण के मामले में यह ज़ू भारत में प्रथम और दुनिया में दूसरे नंबर पर है. इसी अगस्त महीने में यहाँ 19 साल बाद एक बाघिन ने तीन और एक शेरनी ने दो बच्चों को जन्म दिया. बाघों की घटती तादाद संबंधी चिंता के माहौल में ये कुछ राहत देने जैसी बात है.''

लेकिन मैंने जब उन्हें याद दिलाया कि इसी चिड़ियाखाना में पांच साल के अंदर 70 जानवरों की मौत हुई है तो उन्होंने हालात में अब सुधार का दावा किया.

विडम्बना देखिए कि जिस दिन उनसे यह बात हो रही थी, उसी रात शेरनी के नवजात दो बच्चों में से एक की मौत हो गई. हाल ही में जिराफ़ के भी दो बच्चे यहाँ मर चुके हैं. इस तरह पटना के इस जैविक उद्यान में कभी खुशियों की बरसात होने लगती है, तो कभी गहरी उदासी और ग़म के बदल छा जाते हैं.

पर, ये जो हवाई अड्डा के कारण यहाँ बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों को काटा गया है, उन्हें देखकर किसी की भी आँखें नम हो सकती हैं.

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