क्या मोदी सरकार कोडनानी से बना रही है दूरी?

 बुधवार, 29 अगस्त, 2012 को 12:17 IST तक के समाचार

नरोदा पाटिया हत्याकांड में 97 लोगों की मौत हुई थी.

क्या नरेंद्र मोदी सरकार नरोदा पाटिया हत्याकांड में दोषी पाई गई भाजपा विधायक माया कोडनानी से दूरी बनाने की कोशिश कर रही है?

अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित नरोदा पाटिया हत्याकांड मामले में 32 लोगों को दोषी पाया गया है, और दोषी पाए गए लोगों में माया कोडनानी भी शामिल है. मामले में 29 लोगों को बरी कर दिया गया है.

कोडनानी नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल की सदस्य रह चुकी हैं.

फैसले पर प्रतिक्रिया देते गुजरात सरकार में मंत्री जयनारायण व्यास ने पत्रकारों से कहा, "कोई विधायक सरकार का सदस्य नहीं होता. जब ये घटना हुई तो माया कोडनानी सरकार में मंत्री नहीं थीं."

व्यास के इस बयान पर अटकलें लग रही हैं कि गुजरात सरकार खुद को कोडनानी से दूर कर रही हैं.

गौरतलब है कि भाजपा का एक तबका नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किए जाने की वकालत करता रहा है.

कोडनानी के अलावा बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को भी दोषी पाया गया है.

उधर सरकारी वकील अखिल देसाई से अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए दोषी पाए गए लोगों को मौत की सज़ा देने की मांग की.

अखिल देसाई ने कहा, "साज़िश का आरोप साबित हो गया है इसलिए अदालत को मृत्यु दंड को ही देना चाहिए, कोई रियायत नहीं हो सकती क्योंकि हत्या की साज़िश थी. मैंने ये भी कहा है कि जिन दोषियों को मृत्यु दंड नहीं मिलता, उन्हें उम्र कैद की सज़ा होनी चाहिए और वो भी चौदह साल नहीं बल्कि पूरी ज़िंदगी की होनी चाहिए. उन्हें पूरी ज़िंदगी जेल में रहना चाहिए. तीन महिलाओं पर आरोप थे. दो बरी हो गई हैं लेकिन माया कोडनानी दोषी साबित हुई हैं."

अब अदालत 31 अगस्त को दोषी पाए गए लोगों को सज़ा सुनाएगी.

नरोदा पाटिया

गुजरात दंगे

साल 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े कई मामले अब भी अदालतों में चल रहे हैं

गुजरात में हुए दंगों के दौरान 28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया इलाके में 95 मुसलमान मारे गए थे. आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल एक मंत्री ने उस भीड़ का नेतृत्व किया था जिसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया.

इस हत्याकांड के 61 अभियुक्तों में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री और नरोदा पाटिया से विधायक माया कोडनानी, बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी, स्थानीय भाजपा नेता बिपिन पांछाल, किशन कोरानी, अशोक सिंधी और राजू चौमल शामिल थे.

आरोप है कि दंगाईयों का नेतृत्व भाजपा की नेता माया कोडनानी कर रही थीं.

इस हत्याकांड का मुकदमा साल 2009 में शुरू हुआ था. और इसमें 62 लोगों के ख़िलाफ़ अभियोग चलाया गया. इनमें से विजय शेट्टी नाम के एक व्यक्ति की मुकदमें को दौरान मौत हो गई थी.

पिछले साल नंवबर में कांग्रेस कार्यकर्ता और नरोदा पटिया में हुए दंगे के चश्मदीद नदीम अहमद सैयद की हत्या कर दी गई थी. वह सूचना अधिकार के कार्यकर्ता भी थे और उन्होने गोधरा दंगों पर सूचना अधिकार के तहत कई सवाल पूछे थे.

गुजरात दंगों पर अन्य फ़ैसले

तीस जुलाई को गुजरात के मेहसाणा में एक विशेष अदालत ने वर्ष 2002 में हुए दीपड़ा दरवाज़ा दंगों के एक मांमले में 22 लोगों को दोषी ठहराया था. इन लोगों पर हत्या और आपराधिक षडयंत्र के गंभीर आरोप लगाए गए थे.

विशेष अदालत ने 83 अभियुक्तों में से 63 को बरी कर दिया था. बरी होने वालों में भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद गोसा और स्थानीय नगर निगम के प्रमुख दयाभाई पटेल शामिल थे.

इसके अलावा इसी वर्ष चार मई गुजरात के आणंद जिले के ओड गाँव में साल 2002 के दंगों के दौरान के एक मामले पर स्थानीय अदालत ने नौ लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

विशेष अदालत के न्यायाधीश ने इन नौ लोगों को हत्या, दंगे और आपराधिक षंडयंत्र का दोषी पाया था. अदालत ने एक व्यक्ति को छह माह की सज़ा भी सुनाई थी.

इसके अलावा गुजरात दंगों को कई मामले अब भी निचली अदालतों और हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं.

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