आसान नहीं होगा रतन टाटा की राह चलना...

 शनिवार, 1 सितंबर, 2012 को 06:51 IST तक के समाचार

टाटा ग्रुप के मुखिया क्लिक करें रतन टाटा ने शुक्रवार को कोलकाता में आखिरी बार कंपनी की सालाना बैठक में भाग लिया. अपने पद पर 22 साल तक रहने के बाद इस साल दिसंबर में वो रिटायर हो रहे हैं.

बैठक के दौरान माहौल काफी भावुक था. रतन टाटा कंपनी की बागडोर नयी पीढ़ी को सौंप रहे थे. ग्रुप में नए दौर का आग़ाज़ हो रहा था जिसका नेतृत्व 45 वर्षीय क्लिक करें साइरस मिस्त्री करने जा रहे हैं.

बैठक में मौजूद सभी शेयर धारकों ने रतन टाटा की उपलब्धियों को स्वीकार किया और कहा कि उनकी कमी को पूरा करना एक कठिन काम होगा. कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वो रिटायर होने के बाद राजनीति में न जाएँ अगर सोनिया गाँधी कहें तब भी.

'दुःखी हूं नाराज़ नहीं'

रतन टाटा ने भी कुछ शब्द कहे. उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल के क्लिक करें सिंगुर मामले से उन्हें दुःख ज़रूर हुआ है नाराज़गी नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई कि टाटा मोटर्स राज्य में दोबारा जा सकता है.

नवम्बर 2011 में जब टाटा ग्रुप ने साइरस मिस्त्री को रतन टाटा का उत्तराधिकारी घोषित किया तो मुंबई के व्यापार और उद्योग जगत में हैरानी का इज़हार किया गया था. लेकिन अधिकतर लोगों का मानना है कि नए मुखिया, ग्रुप को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं.

"मैं मिस्त्री के काम से काफी प्रभावित हुआ हूँ. वो २006 से टाटा बोर्ड के एक सदस्य हैं और मैंने उनके काम को देखा है. मैं काफी प्रभावित हूँ."

रतन टाटा

साइरस मिस्त्री का चयन उम्मीद के अनुसार नहीं था, क्यूंकि अधिकतर लोगों का विचार था की रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया जाएगा.

अपने उत्तराधिकारी के चयन के समय रतन टाटा ने कहा था, "मैं मिस्त्री के काम से काफी प्रभावित हुआ हूँ. वो 2006 से टाटा बोर्ड के एक सदस्य हैं और मैंने उनके काम को देखा है. मैं काफी प्रभावित हूँ."

व्यापारिक साम्राज्य

आज भी रतन टाटा ने अपने उत्तराधिकारी की तारीफ़ की और कहा कि ग्रुप की ज़िम्मेदारियां वो एक सही आदमी के हाथ सौंप रहे हैं. साइरस मिस्त्री रतन टाटा के साथ पिछले दस महीने से काम कर रहे हैं. मुमकिन है कि उन्होंने अपने अज़ीज़ को अपने नेतृत्व में वो सारे गुण सिखाए होंगे जिसका इस्तेमाल करके उन्होंने टाटा ग्रुप को 80 अरब डॉलर का क्लिक करें व्यापारिक साम्राज्य बनाया है.

रतन टाटा ग्रुप के चैयरमैन की हैसियत से वो 21 साल अपने पद पर बने रहे. उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप एक ग्लोबल कंपनी बन कर उभरी है. इसीलिए अधिकतर विशेषज्ञों का कहना है कि रतन टाटा की जगह भरना एक बहुत ही कठिन काम होगा.

ऑटो सेक्टर के एक विशेषज्ञ भगवान दास के अनुसार मिस्त्री 2006 से बोर्ड के सदस्य ज़रूर हैं लेकिन उनको इतनी बड़ी कंपनी चलाने का बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है.

इस्पात कम्पनी फीनिक्स के निदेशक मनोज सिंह कहते हैं मिस्त्री एक संजीदा इंसान हैं और रतन टाटा की अगुवाई में एक साल तक रहे हैं, कुछ महीने और रहेंगे. ज़ाहिर है उन से अच्छा उस्ताद मिस्त्री को नहीं मिलेगा.

विरासत

रतन टाटा 1991 से टाटा ग्रुप के अध्यक्ष हैं और अब इस साल दिसंबर में वो रिटायर हो रहे हैं. इस दौरान उन्होंने ग्रुप का खूब विस्तार किया. विदेश जाकर कई कंपनियां खरीदीं जिनमें टेटले टी, जगुआर और कोरस इस्पात कंपनियां शामिल हैं.

टाटा ग्रुप ने दक्षिण अफ्रीका में भी अरबों डालर का निवेश कर रखा है. अपने काल में उन्होंने टाटा ग्रुप का धंधां अलग-अलग क्षेत्रों में शुरू कराया और आज यह ग्रुप 80 अरब डॉलर की मलकियत हो गया है. रतन टाटा को एक लाख कीमत वाली नैनो को लॉंच करने का श्रेय भी जाता है.

उनकी क़ामयाबियों को देखते हुए साइरस मिस्त्री कहते हैं कि रतन टाटा की क्लिक करें विरासत को कायम रखना आसान नहीं होगा का. लेकिन कंपनी के फ़ैलाव और विस्तार की विरासत को वो जारी रखेंगे.

टाटा ग्रुप 100 कंपनियों से मिलकर बना है. ये कंपनियां सात अलग-अलग क्षेत्रों में हैं. इस ग्रुप की कमाई का 60 फिसदी हिस्सा इसकी विदेशी कंपनियों से आता है. ग्रुप में 4 लाख 30 हज़ार लोग काम करते हैं और इस समूह की कुछ प्रसिद्ध कंपनियों में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टीओसीएस, टाटा पावर और इंडिया होटल्स शामिल हैं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.