कूड़े के ढेर पर बैंगलोर

 रविवार, 2 सितंबर, 2012 को 08:39 IST तक के समाचार

बैंगलोर की सड़कों पर कूड़ा जमा है लेकिन उसे हटाकर कहीं ले जाने की जगह नहीं है.

भारत में आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी तकनीक जगत की बड़ी कंपनियों का घर माने जाने वाले बैंगलोर शहर में लाखों किलो कूड़ा इकट्ठा हो गया है.

दरअसल कूड़ा शहर से बाहर बसे गांवों में फेंका जाता रहा है. लेकिन अब इन गांववालों ने इसका विरोध किया है.

मंडूर गांव की पंचायत के एक सदस्य मुनिराजू ने कहा, “हमारा स्वास्थ्य भी उतना ही ज़रूरी है जितना शहरी लोगों का, हम कूड़ा हमारे घरों के पिछवाड़े में फेंके जाने के इस सिलसिले को चलने नहीं देंगे.”

नतीजा ये कि शहर में रोज़ाना इकट्ठा होनेवाला करीब 45 लाख किलो कूड़ा हटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है.

हड़ताल

"हमारा स्वास्थ्य भी उतना ही ज़रूरी है जितना शहरी लोगों का."

मुनिराजू, मंडूर गांव के निवासी

बैंगलोर में कूड़ा जमा कर उसे निपटाने की तीन जगह हैं. इनमें से एक बैंगलोर के बाहरी इलाके मवालीपुरा में है जिसे जुलाई में कूड़ा वैज्ञानिक ढंग से नहीं हटाए जाने के आरोपों के चलते बंद कर दिया गया था.

इसी के बाद अन्य दो जगहों के पास बसे गांवों ने भी विरोध की आवाज़ बुलंद की और गांवों में कूड़ा ला रहे ट्रकों को रोक दिया.

इसी बीच बृहत बेंगलूरू महानगर पालिका के कर्मचारी भी बेहतर वेतन और उसके समय पर भुगतान की मांग के साथ हड़ताल पर चले गए.

अगस्त के पहले हफ्ते में की गई ये हड़ताल तीन दिन ही चली पर उसका असर अब भी दिखाई दे रहा है.

बैंगलोर के मेयर ने बीबीसी को बताया कि ये संकट दो गांवों के स्वास्थ्य कारणों से अपने इलाकों के पास कूड़ा फेंके जाने का विरोध करने के बाद पैदा हुआ.

अधिकारी अब ऐसी अन्य जगहों को तलाश रहे हैं ताकि शहर में पड़े बदबूदार कूड़े को हटाया जा सके.

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