पाकिस्तान को बिजली: 'भूखे पेट दान'

 सोमवार, 3 सितंबर, 2012 को 11:36 IST तक के समाचार

निरुपमा राव ने कहा कि पड़ोसी देशों को दी जाने वाली प्रस्तावित बिजली की मात्रा बहुत कम ही होगी.

अमरीका को भारत की राजदूत निरुपमा राव ने कहा है कि भारत पाकिस्तान को 500 मेगावॉट बिजली देने की संभावना पर विचार कर रहा है.

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर के माध्यम से उन्होंने ट्वीट किया, “नेपाल और बांग्लादेश की बिजली ज़रूरतों पर भी भारत विचार कर रहा है.”

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक भारत में सालाना 1,70,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है लेकिन मांग के मुकाबले ये कम ही पड़ता है.

योजना आयोग के अनुसार देश में पीक समय में बिजली की कमी 10 फीसदी होती है जबकि सामान्यतया सात फीसदी बिजली की कमी होती है.

लेकिन बिजली का कम उत्पादन ही बिजली की कटौती की वजह नहीं है, इसकी पीछे स्थानीय स्तर पर बिजली चोरी और बड़े स्तर पर राज्यों के अपनी सीमा से ज़्यादा बिजली खींचना ज़िम्मेवार है.

ज़ाहिर है हाल ही में देश के दो पावर ग्रिड के एक साथ फेल होने से परेशान हुई जनता ने भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव के इस ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया दी.

'भूखे पेट दान...'

"ये मानना ग़लत होगा कि इस मदद की वजह से भारत को बिजली की कमी हो जाएगी, ये हमारी मंशा कभी भी नहीं रही है."

निरुपमा राव, पूर्व विदेश सचिव

इस पर देबशिश दत्ता (@abGOLikha) ने लिखा, “गुड़गांव जैसे बड़े शहरों में घंटों बिजली नहीं रहती, छोटे शहरों का क्या हाल होगा.. अमरीका की तरह पहले हमें अपना घर ठीक करना चाहिए, फिर दूसरों की सोचें.”

@ashutoshmerchy ने लिखा – “भूखे पेट दान देने में समझदारी नहीं है...”

@roshandawrani ने लिखा – “मैं उत्तर प्रदेश का रहनेवाला हूं जहां रोज़ाना घंटो बिजली नहीं रहती, मुझे नहीं मालुम था हमारे पास बेचने के लिए अतिरिक्त बिजली है...”

इन सब ट्वीट्स पर निरुपमा राव ने जवाब देते हुए कहा कि भारत के नेशनल ग्रिड में वर्ष 2007 से 2012 के बीच 55,000 मेगावॉट बिजली की क्षमता बढ़ाई गई, जिसमें वर्ष 2011-2012 में ही 20,500 मेगावॉट बिजली शामिल है.

उन्होंने कहा, “ये मानना ग़लत होगा कि इस मदद की वजह से भारत को बिजली की कमी हो जाएगी, ये हमारी मंशा कभी भी नहीं रही है और साथ ही ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि पड़ोसी देशों को दी जाने वाली प्रस्तावित बिजली की मात्रा बहुत कम है.”

राव ने कहा कि भारत कोई द्वीप नहीं है, इसलिए उसका अपने क्षेत्र के पड़ोसियों की ज़रूरतों का ध्यान रख हर मुमकिन मदद के बारे में सोचना लाज़मी है.

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