नाकाम प्रधानमंत्री कहलाए जाएँगे मनमोहन?

 बुधवार, 5 सितंबर, 2012 को 20:11 IST तक के समाचार

मनमोहन सिंह ने 90 के दशक में अर्थव्यवस्था को उदार बनाने में अहम भूमिका निभाई

किसी समय में पश्चिमी मीडिया में सराहना और सुर्खियाँ बटोरने वाले भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब लगता है कि पश्चिमी मीडिया के निशाने पर आ गए हैं.

पहले टाइम पत्रिका ने उन्हें 'अंडरएचीवर' कहा तो फिर इंडिपेंडेंट ने उनकी आलोचना की और अब अमरीका के जाने माने अखबार 'वाशिंगटन पोस्ट' ने उनकी काबिलियत पर सवाल उठाए हैं.

जहाँ टाइम ने अपने कवर पर मनमोहन सिंह की तस्वीर छापकर उन्हें 'अंडरएचीवर' बताया था, वहीं वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि अब नौबत ऐसी आ गई है कि खतरा है कि मनमोहन सिंह को इतिहास में एक विफल नेता के तौर पर ही याद किया जाए.

भारत सरकार ने इस पर खासी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने खबर की निंदा करते हुए वॉशिंगटन पोस्ट पर 'सनसनी फैलाने वाली पत्रकारिता' करने का आरोप लगाया है और कहा है कि वे भारत के विदेश मंत्रालय से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की बात करेंगी.

वॉशिंगटन पोस्ट में मनमोहन सिंह के बारे में छपी खबर में प्रधानमंत्री का पक्ष शामिल नहीं किया गया है. इसके लेखक साइमन डेनयर ने सीएनएन-आईबीएन चैनल के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने जून में प्रधानमंत्री से इंटरव्यू के लिए अपना आग्रह भेजा था. इस बारे में सरकार और कांग्रेस के लोगों से उनकी बात हुई लेकिन प्रधानमंत्री से इंटरव्यू के उनके आग्रह को ठुकरा दिया गया.

'नाकाम प्रधानमंत्री'

वॉशिंगटन पोस्ट में छपी खबर कहती है कि भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने देश को आधुनिकता, समृद्धि और शक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन शर्मीले, मृदुभाषी 79 वर्षीय मनमोहन सिंह पर अब इतिहास में एक नाकाम प्रधानमंत्री के तौर पर दर्ज होने का खतरा मंडरा रहा है.

वॉशिंगटन पोस्ट:

"प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने देश को आधुनिकता, समृद्धि और शक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन शर्मीले, मृदुभाषी 79 वर्षीय मनमोहन सिंह पर अब इतिहास में एक नाकाम प्रधानमंत्री के तौर पर दर्ज होने का खतरा मंडरा रहा है...

दूसरे कार्यकाल में उनकी छवि में नाटकीय रूप से गिरावट आई है और धीरे धीरे उनकी प्रतिष्ठा भी तार तार हो रही है. सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में भी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस सबके चलते विश्व शक्ति बनने की भारत की संभावनाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं."

भारत के आर्थिक सुधारों के निर्माता कहे जाने वाले मनमोहन सिंह को अमरीका और भारत के बीच रिश्ते बेहतर होने का खास तौर से श्रेय दिया जाता है और विश्व मंच पर उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सहयोगी हमेशा मनमोहन के साथ शानदार संबंधों और दोस्ती की मिसाल देते रहे हैं.

प्रकाशित लेख के अनुसार - 'बेहद सम्मानित, विनम्र और बुद्धिमान टेक्नोक्रैट होने की मनमोहन सिंह की छवि से अब एक बिल्कुल ही अलग छवि उभर रही है. ये छवि है एक ऐसे प्रभावहीन नौकरशाह की जो भ्रष्टाचार से डूबी सरकार का नेतृत्व कर रहा है. पिछले दो हफ्तों से हर दिन भारतीय संसद हंगामे और शोरशराबे के बीच स्थगित होती रही है. विपक्ष कोयला आवंटन में कथित घोटाले पर प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग रहा है."

'खूबियां बनीं खामियां'

"कैसे कोई अमरीकी अखबार इस मामले को इतने हल्के में ले सकता है और किसी अन्य देश के प्रधानमंत्री के बारे में कुछ भी छाप सकता है. मैं विदेश मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों से बात करूंगी और निश्चित तौर पर इस मुद्दे पर कदम उठाया जाएगा."

अंबिका सोनी, सूचना और प्रसारण मंत्री

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक बतौर प्रधानमंत्री अपने दूसरे कार्यकाल में उनकी छवि में नाटकीय रूप से गिरावट आई है और धीरे धीरे उनकी प्रतिष्ठा भी तार तार हो रही है. सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में भी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस सबके चलते विश्व शक्ति बनने की भारत की संभावनाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं.

अमरीकी अखबार कहता है कि ये विडंबना ही है कि ईमानदार छवि और आर्थिक अनुभव जैसी जो चीजें कभी मनमोहन सिंह की खूबियां हुआ करती थीं, अब वही उनकी सरकार की नाकामियों का आइना बन गई हैं.

हालांकि मनमोहन सिंह ने कोयला आवंटन में ‘किसी भी अनियमितता’ से इनकार किया है, लेकिन जब वो संसद में इस बारे में बयान दे रहे थे तो शोर शराबे के बीच उनकी पूरी बात भी नहीं सुनी गई.

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पहला कार्यकाल प्रभावशाली रहा. 2008 में अमरीका के साथ परमाणु करार के मुद्दे पर उन्होंने न सिर्फ गठबंधन सहयोगियों बल्कि अपने पार्टी के भीतर उठे विरोध का भी मजबूती से सामना किया.

मनमोहन सिंह

विपक्ष मनमोहन पर कमजोर प्रधानमंत्री होने के आरोप लगाता रहा है.

ये एक बड़ा समझौता था जिससे अंतराष्ट्रीय समुदाय में भारत का अलगाव दूर हुआ. दरअसल 1974 और 1998 में परमाणु परीक्षणों के कारण भारत परमाणु क्षेत्र में अलग थलग पड़ा था.

सरकार की नाराजगी

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के दिनों से ही मनमोहन सिंह के दोस्त रहे और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जगदीश एन भगवती कहते हैं, “उनमें जबरदस्त प्रतिभा है, लेकिन कभी कभी उन्हें राजनीतिक व्यावहारिकता और चीजों को करवाने से जुड़े संदेहों का खमियाजा उठाना पड़ता है.”

वहीं राजनीतिक इतिहासकार रामचंद्र गुहा का कहना है कि मनमोहन सिंह को इतिहास में पहले सिख प्रधानमंत्री और तीसरे सबसे ज्यादा समय तक इस पद पर रहने वाले व्यक्ति के तौर पर याद रखा जाएगा. लेकिन वो ऐसे व्यक्ति के तौर पर भी याद किए जाएंगे, जिसे यह नहीं पता है कि उसे कब रिटायर होना है.

"वो बेशक थके हुए हैं. उम्र के इस पड़ाव में उनसे ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि कहीं से और ऊर्जा जुटा लेंगे. चीजें भयानक रूप से उनके नियंत्रण से बाहर हो रही हैं. आगे भी उनके लिए, उनकी सरकार और पार्टी के लिए चीजें खराब ही होंगी."

रामचंद्र गुहा, इतिहासकार

वो कहते हैं, “वो बेशक थके हुए हैं. उम्र के इस पड़ाव में उनसे ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि कहीं से और ऊर्जा जुटा लेंगे. चीजें भयानक रूप से उनके नियंत्रण से बाहर हो रही हैं. आगे भी उनके लिए, उनकी सरकार और पार्टी के लिए चीजें खराब ही होंगी.”

भारत की सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने इस खबर की निंदा करते हुए कहा, "हमारे प्रधानमंत्री के बारे में किसी विदेशी अखबार में छपी बेबुनियाद खबर को लेकर हमारी अपनी चिंताएं हैं."

उन्होंने सवाल किया, "कैसे कोई अमरीकी अखबार इस मामले को इतने हल्के में ले सकता है और किसी अन्य देश के प्रधानमंत्री के बारे में कुछ भी छाप सकता है. मैं विदेश मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों से बात करूंगी और निश्चित तौर पर इस मुद्दे पर कदम उठाया जाएगा."

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.