पति पीटता है तो शिकायत न करें: हाईकोर्ट जज

 गुरुवार, 6 सितंबर, 2012 को 15:12 IST तक के समाचार
महिलाएं

भारत में शादी के बाद महिलाओं के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की घटना एक आम बात है

कर्नाटक हाईकोर्ट में कार्यरत एक जज की एक पति-पत्नी विवाद पर दी गई सलाह से महिला अधिकार संगठनों और अनेक समाजसेवियों ने कड़ी आपत्ति जताई है.

कर्नाटक उच्च न्यायालय में वर्ष 2004 से न्यायाधीश के पद पर काम कर रहे जस्टिस भक्तवत्सला के सामने जब पति-पत्नी की लड़ाई का एक मामला आया तो इस मामले पर फैसला सुनाते हुए उन्होंने पीड़ित पत्नी से कहा, ''हर शादी में ऊंच-नीच होती है और अगर किसी महिला का पति उसके साथ मारपीट करता है तो उसे इसकी शिकायत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वो उसका आजीवन देखभाल भी करता है. आपके पति अच्छा-खासा कमा रहे हैं."

"हर शादी में ऊंच-नीच होती है और अगर किसी महिला का पति उसके साथ मारपीट करता है तो उसे इसकी शिकायत नहीं करनी चाहिए. क्योंकि वो उसकी आजीवन देखभाल भी करता है"

जस्टिस भक्तवत्सला, कर्नाटक हाईकोर्ट

जस्टिस भक्तवत्सला ने आगे कहा कि महिला को अपने घर की सुख-शांति और अपने दो बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पति के व्यवहार से समझौता कर लेना चाहिए.

हालांकि मामले के तूल पकड़ने के बाद बुधवार को न्यायाधीश जस्टिस भक्तवत्सला ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. उनके मुताबिक उन्होंने कभी भी महिलाओं के साथ मार-पीट किए जाने का समर्थन नहीं किया है.

जस्टिस भक्तवत्सला ने कहा कि वे हमेशा टूटती हुई शादियों को बचाने के हिमायती रहे हैं और इसी की कोशिश करते हैं.

विरोध

भक्तवत्सला के इन बयानों ने महिलाओं के लिए काम कर रही संस्थाओं को उनके खिलाफ़ ला खड़ा किया है.

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था विमोचना की कार्यकर्ता डोना फर्नांडिस ने स्थानीय संवाददाता हबीब बेयरी से बातचीत करते हुए कहा, ''हमने जस्टिस भक्तवत्सला के खिलाफ़ कार्रवाई किए जाने के लिए इंटरनेट पर एक अभियान चलाया है. हम चाहते हैं कि उन्हें उनके पद से हटाया जाए.''

"अगर न्यायधीश इस तरह के पक्षपात पूर्ण बयान देने लग जाएंगे तो महिलाएं अपने साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ़ कहां आवाज़ उठाएंगी."

ममता शर्मा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग.

कर्नाटक हाईकोर्ट में वकील और पूर्व विधायक प्रमिला नेसार्गी ने बीबीसी को बताया, '' हमने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन देकर जस्टिस भक्तवत्सला के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग की है. अदालत में अभियोग की कार्यवाही काफी लंबी होती है इसलिए हम चाहते हैं कि या तो उनका ट्रांसफर कर दिया जाए या महिला संबंधी मामलों की सुनवाई में उनको शामिल ना किया जाए.''

मुंबई स्थित महिला अधिकारों के लिए काम कर रही कार्यकर्ता कामायनी बाली महाबल ने भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस एसएच कपाडिया को 500 लोगों द्वारा हस्ताक्षर की गई एक याचिका भेज कर मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है.

इस प्रार्थना पत्र में जस्टिस भक्तवत्सला द्वारा दिए गए विवादास्पद बयानों की निष्पक्ष जांच करवाए जाने की भी मांग की गई है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने भी जस्टिस भक्तवत्सला के बयानों की निंदा की है और इसे एक परेशान करने वाला बयान बताया है.

ममता शर्मा के मुताबिक, ''अगर न्यायधीश इस तरह के पक्षपातपूर्ण बयान देने लगेंगे तो महिलाएं अपने साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ़ कहां आवाज़ उठाएंगी.''

उनका मानना है कि इसीलिए संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा दिए जा रहे इन गैरज़िम्मेदार बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया होनी चाहिए.

पहली बार नहीं

जस्टिस भक्तवत्सला द्वारा दी गई ये पहली विवादास्पद टिप्पणी नहीं है. इससे पहले भी उन्होंने कई मौकों पर इसी तरह के बयान दिए हैं.

महिलाएं

घर पर सुख-शांति बनाए रखने के लिए अक्सर महिलाओं से चुप रहने को कहा जा जाता है.

इस ताज़ा मामले में तो उन्होंने अदालत में ही मौजूद एक महिला जज बीएस इंद्रकला पर भी टिप्पणी करते हुए कह दिया, ''मुझे मालूम है कि आप भी कितने कष्टों से गुज़री हैं लेकिन वो कष्ट एक महिला होने की तकलीफों के सामने कुछ भी नहीं है.''

भक्तवत्सला ने पीड़ित दंपति के सामने एक अन्य कामकाजी पति-पत्नी का उदाहरण दिया जिन्होंने अपने बच्चे की बेहतरी के लिए उनकी सलाह को मानते हुए अलग होने की ज़िद को छोड़ दिया था.

पिछले हफ्ते ही जस्टिस भक्तवत्सला ने एक वैवाहिक विवाद के मामले में बहस कर रही एक अविवाहित महिला वकील को भी अपना काम करने से रोक दिया था. उन्होंने उस महिला वकील से कहा कि, ''वे इस तरह के मामले पर बहस करने या अपनी राय देने के लायक नहीं हैं क्योंकि वो खुद अविवाहित हैं. 'शादी' कोई सार्वजनिक यातायात प्रणाली नहीं है जिस पर हर कोई आकर सवार हो जाए.''

साल 2004 से कर्नाटक हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस भक्तवत्सला पहले भी अपनी अति उत्साहित कदमों के कारण चर्चित रहे हैं.

उन्हें अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी को अपने खर्चे पर लंच के लिए भेजने, कोर्ट के खर्चे पर तनाव में रह रहे दंपति को घर से अलग किसी क्लब में दो दिन बिताने जैसा इंतज़ाम करवाते भी देखा गया है. उन्होंने मीडिया को आड़े-हाथ लेते हुए उस पर उनकी बातों को बेवजह तूल देने का आरोप लगाया है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.