कार्टूनिस्ट असीम पर देशद्रोह के आरोपों का व्यापक विरोध

 सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 22:02 IST तक के समाचार
असीम त्रिवेदी

असीम त्रिवेदी को रविवार को 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी पर उनके कार्टून के आधार पर राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने और देशद्रोह के आरोप लगे हैं.

जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं, कुछ राजनीतिक दलों, पत्रकारों, कार्टूनिस्टों और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे संगठन इंडिया अगेंस्ट करप्शन यानी आईएसी ने इसकी कड़ी आलोचना की है.

भष्टाचार विरोधी आईएसी ने मांग की है कि असीम को तुरंत रिहा किया जाए क्योंकि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं. संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुंबई में उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है.

भारतीय संविधान को नीचा दिखाने और अपनी वेबसाइट पर कथित 'देशद्रोह' की सामग्री छापने के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी की भारत के विभिन्न हिस्सों में, सोशल और अन्य मीडिया पर जबरदस्त आलोचना हो रही है.

आईएसी के अरविंद केजरीवाल ने कहा, ''देशद्रोह के आरोप तब लगते हैं जब कोई देश के खिलाफ युद्ध छेड़ता है. असीम त्रिवेदी के कार्टूनों बनाने पर इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते.''

'पुलिस हिरासत नहीं'

वकील वाईपी सिंह

"जहां तक मैंने सुना है आप अधिक से अधिक राष्ट्रीय सम्मान को अपमान से बचाने के कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं न कि देशद्रोह के आरोपों के तहत जिसमें अधिक सज़ा का प्रावधान है."

इस बीच असीम की गिरफ्तारी पर मचे बवाल के बाद पुलिस ने माना कि उनकी पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं थी. पुलिस ने अपना रुख बदला और असीम को अब 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.

महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने तो साफ कह दिया कि उनके पुलिस रिमांड की कोई जरूरत नहीं थी.

उन्होंने कहा, ''पुलिस की जांच पूरी हो चुकी थी. पुलिस हिरासत की मांग करने की कोई जरूरत नहीं थी. मैं मामले की जांच कर रहा हूँ. हम यह बात अदालत में कहेंगे.''

केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने कहा था, ''कुछ कार्यकर्ता हमसे मिले और उन्होंने हमें असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी की जानकारी दी. हम वहां सरकार से बात करेंगे. अगर मदद करने लायक होगा तो मदद की जाएगी.''

'अघोषित आपातकाल'

जाने माने कार्टूनिस्ट सुधीर तेलंग ने बीबीसी से बात करते हुए सरकार और नेताओं को आडे हाथों लिया. उन्होंने कहा, ''संसद के अंदर तो इनका 'सेंस ऑफ ह्युमर' खत्म हो चुका है. संसद के बाहर भी इन्हें यह मंज़ूर नहीं है. साल 1975 में घोषित रूप से आपातकाल था. तब एक सेंसर बोर्ड होता था जो खबरों और कार्टूनों को सेंसर करता था.''

काटजू

मार्कण्डेय काटजू ने भी असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का विरोध किया है

उन्होंने कहा, ''अब सेंसरशिप और आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है. लेकिन यह अघोषित आपातकाल है जो और भी दुखद है, और भी खतरनाक है.''

वरिष्ठ पत्रकार और टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन के संपादक राजदीप सरदेसाई ने कहा है, ''मैं इसे बहुत खतरनाक मानता हूँ कि आप इस देश में नफरत भड़काने वाले भाषण से तो बच सकते हैं लेकिन राजनीतिक व्यंग्य के बाद आप तुरंत गिरफ्तार किए जाते हैं.''

'गलत कानून के तहत'

एक पूर्व पुलिस अधिकारी और वकील वाईपी सिंह ने मिंट समाचार पत्र को बताया, ''जहां तक मैंने सुना है आप अधिक से अधिक राष्ट्रीय सम्मान को अपमान से बचाने के कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं न कि देशद्रोह के आरोपों के तहत जिसमें अधिक सज़ा का प्रावधान है.''

असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि असीम त्रिवेदी ने कोई ग़लत काम नहीं किया है.

जस्टिस काटजू ने कहा, ''मेरे विचार से कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत-सी बातें कही जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी ग़लत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ़्तार करना भी एक अपराध है.''

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर असीम की गिरफ्तारी का जबरदस्त विरोध हो रहा है और लोग उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं.

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