असीम त्रिवेदी को ज़मानत देने का आदेश, रिहाई कल

 असीम
Image caption राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के आरोप झेल रहे असीम न्यायिक हिरासत में हैं

बॉम्बे हाई कोर्ट ने देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए गए कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. अदालत ने उन्हें 5,000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया है.

यह आदेश एक वकील संस्कार मराठे द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर आया है.

महाराष्ट्र सरकार ने इस जनहित याचिका का विरोध किया था और कहा था कि असीम को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता.

हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि वो वाजिब कारण बताए कि किस आधार पर असीम को जमानत नहीं दी जा सकती.

औपचारिकताएं पूरी होने के बाद असीम को कल रिहा किया जा सकता है.

'देशद्रोह का मामला वापस होगा'

इससे पहले महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने कहा था कि कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के खिलाफ चलाया जा रहा देशद्रोह का मामला वापस होगा. वे फिलहाल 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में हैं.

कार्टूनों के आधार पर राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान और देशद्रोह के आरोप झेल रहे असीम के खिलाफ लगे देशद्रोह के आरोपों से पूरे भारत के विभिन्न वर्गों के लोगों ने मुखर होकर इसका विरोध किया था.

इस बीच अरविंद केजरीवाल ने मुंबई के आर्थर जेल में जा कर असीम से मुलाकात की और मांग की कि उनके खिलाफ लगाए गए मामले वापस लिए जाएं. उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर वे इसके खिलाफ धरना देंगे.

Image caption असीम त्रिवेदी ने इससे पहले जमानत लेने से इनकार किया था

दो दिनों में यह दूसरी बार है कि महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों ने इस मामले पर अपना रुख बदला है.

इससे पहले असीम की गिरफ्तारी पर मचे बवाल के बाद पुलिस ने माना था कि उनकी पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं थी. असीम को पुलिस हिरासत से निकालकर 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

लेकिन उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला खत्म किए जाने की भी जबरदस्त मांग उठ रही थी.

सामाजिक कार्यकर्ताओं, कुछ राजनीतिक दलों, पत्रकारों, कार्टूनिस्टों और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे संगठन इंडिया अगेंस्ट करप्शन यानी आईएसी ने उनकी गिरफ्तारी की आलोचना के साथ ही ये मांग भी की थी कि देशद्रोह के आरोप वापस किए जाएं.

पुलिस रिमांड

सोमवार को भी महाराष्ट्र के गृह मंत्री पाटिल ने मामले में दखल देते हुए कहा था कि उनके पुलिस रिमांड की कोई जरूरत नहीं थी. इसके बाद ही पुलिस ने अपना रुख बदला था.

उन्होंने कहा था, ''पुलिस की जांच पूरी हो चुकी थी. पुलिस हिरासत की मांग करने की कोई जरूरत नहीं थी. मैं मामले की जांच कर रहा हूँ. हम यह बात अदालत में कहेंगे.''

एक पूर्व पुलिस अधिकारी और वकील वाईपी सिंह ने मिंट समाचार पत्र को बताया था, ''जहां तक मैंने सुना है आप अधिक से अधिक राष्ट्रीय सम्मान को अपमान से बचाने के कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं न कि देशद्रोह के आरोपों के तहत जिसमें अधिक सज़ा का प्रावधान है.''

असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने भी विरोध किया था.

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