कुडनकुलम के विरोध में समंदर में सत्याग्रह

 गुरुवार, 13 सितंबर, 2012 को 16:08 IST तक के समाचार
कुडनकुलम

प्रदर्शनकारियों ने मध्य प्रदेश के जल सत्याग्रह के तर्ज पर ये सत्याग्रह शुरू किया है

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा प्लांट का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने अनोखा तरीक़ा अपनाया है. गुरुवार को अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराते हुए उन्होंने समंदर में एक मानव शृंखला बनाई है.

कुडनकुलम के निकट इंडिनतकराई तट के पास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश के खंडवा में हुए जल सत्याग्रह से प्रेरणा लेते हुए प्रदर्शनकारी समंदर में घुस गए.

इन प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं.

कुडनकुलम प्लांट के विरोध में प्रदर्शन पिछले एक साल से चल रहा है. लेकिन पिछले दिनों पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था.

मूवमेंट अगेंस्ट न्यूक्लियर एनर्जी (पीएमएएनई) के कार्यकर्ता समुद्र तट के निकट पानी में घुस कर खड़े हो गए हैं.

सुरक्षा

पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी है. बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी समुद्र तट के आसपास के इलाक़ों में तैनात किए गए हैं.

प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगे हैं- कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए ईंधन भरने की प्रक्रिया पर रोक, परमाणु विरोधी आंदोलन के नेताओं की गिरफ़्तारी की योजना पर रोक, जिन लोगों को नुकसान हुआ है, उनके पर्याप्त मुआवजा और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई.

नए विरोध प्रदर्शनों का दौर उस समय से शुरू हुआ है, जब आंदोलन के नेता एसपी उदयकुमार के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. पहले उन्होंने समर्पण करने की पेशकश की थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे ठुकरा दिया था.

दरअसल पिछले दिनों विरोध प्रदर्शनों में हुई हिंसा के बाद पुलिस फायरिंग में एक मछुआरे की मौत हो गई थी. उसके बाद ही उदयकुमार ने समर्पण करने की योजना त्याग दी.

विरोध प्रदर्शनों का ताज़ा दौर ईंधन लादने को हरी झंडी देने के बाद शुरू हुआ है.

पूरे कुडनकुलम शहर को पलिस ने क़रीब-क़रीब सील कर दिया है. शहर के प्रमुख ठिकानों पर पुलिस ने घेराबंदी कर रखी है.

छापेमारी

कुडनकुलम

कुडनकुलम परियोजना की क्षमता एक हज़ार मेगावाट है

इस बीच पुलिस ने सोमवार की घटना के मद्देनज़र कुछ आंदोलनकर्मियों की तलाश में कई घरों में छापेमारी की है.

रूस की सहायता से क़रीब 13 हज़ार करोड़ की लागत से बनाया जा रहा कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र तमिलनाडु के तिरुनेलवेली ज़िले में है.

इस संयंत्र में छह रिएक्टर होंगे. ये भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा संयंत्र होने वाला है. इस संयंत्र की क्षमता एक हज़ार मेगावाट की है.

लेकिन इसके विरोधियों का कहना है कि इस संयंत्र की वजह से मछुआरों और ग्रामीणों को रोजी-रोटी पर चोट पहुंचेगी. दरअसल वर्ष 2004 में आई सूनामी के कारण तमिलनाडु का यह तटवर्ती इलाक़ा काफ़ी प्रभावित हुआ था.

प्रदर्शनकारी जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र का हवाला देते हुए सुरक्षा पर चिंता जता रहे हैं. लेकिन सरकार उनके भय को गलत बताती रही है. सरकार का दावा है कि संयंत्र के मद्देनज़र सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया है.

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