आज 'सैटेनिक' छापना मुश्किल: रुश्दी

Image caption रुश्दी ने सैटेनिक वर्सेस सन 1988 में लिखी थी जिसके बाद उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया था

भारतीय मूल के ब्रितानी लेखक सलमान रुश्दी ने कहा है कि आज के भय और तनाव से भरे समय में उनका उपन्यास ‘सैटेनिक वर्सेस’ प्रकाशित नहीं किया जा सकता.

उन्होंने ये उपन्यास सन 1988 में लिखा था जिसके बाद विश्व भर के मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन किए और इरान के धर्मगुरु अयातोल्ला खोमीनी ने उनकी मौत के आदेश जारी किए थे.

मुसलमान समुदाय का आरोप था कि ‘सैटेनिक वर्सेस’ किताब में प्रोफेट मोहम्मद का तिरस्कार किया गया था.

सलमान रुश्दी ने बीबीसी संवाददाता विल गोंपेरेट्ज़ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनकी किताब पर कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया जिसका दीर्घकालिक असर हुआ.

उन्होंने कहा, “इस्लाम की आलेचना करने वाली उस किताब को वर्तमान स्थिति में प्रकाशित करना मुश्किल होगा. एक स्वतंत्र समाज में रहने का सिर्फ एक ही तरीका है, और वो है कुछ भी कहने की आज़ादी और हक रखना.”

ये किताब भारत में भी प्रतिबंधित है क्योंकि कई मुसलमान इसे ईशनिंदात्मक मानते हैं.

अभिव्यक्ति की आज़ादी

65 वर्षीय सलमान रुश्दी कई सालों से छिप कर रह रहे हैं क्योंकि अयातोल्ला खोमीनी ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया था और उन्हें फांसी दिए जाने का आह्वान किया था.

सलमान रुश्दी का कहना है कि तुर्की, मिस्र, एल्जीरिया और इरान जैसे मुसलमान-बहुल देशों में लेखकों को प्रताड़ित किया जाता है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “अगर आप देखें कि धार्मिक कट्टरपंथ के नाम पर जिस तरीके से अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले हो रहे हैं, तो आपको महसूस होगा कि इस तरह के सभी लोगों पर एक ही तरह के इल्ज़ाम लगाए जाते हैं – ईशनिंदा, तिरस्कार, धर्म पर आक्रमण वगैरह वगैरह. ये तो मध्यकालीन सोच हुई. हम इस समय एक कठिन चौराहे पर खड़े हैं जहां हमारे आसपास बहुत ज़्यादा भय और तनाव है.”

तनाव भरा माहौल

उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते जब चैनल 4 ने इस्लाम पर एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी, तब चैनल को धमकियां मिलने लगी थीं.

हालांकि सलमान ने ये भी कहा कि उनके खिलाफ जारी हुए फतवे की 20वीं सालगिरह पर जिन लोगों ने एक समय में उनके खिलाफ फतवे का समर्थन किया था, उनमें से कुछ ने अखबारों को दिए इंटर्व्यू में बताया कि उन्होंने गलत किया था.

सलमान ने कहा, “कुछ लोगों ने ये माना कि अभिव्यक्ति की आज़ादी होनी चाहिए और उनसे अलग सोच रखने वालों के खिलाफ बुरी भावना रखना गलत है. अगर ऐसा है तो हम तनाव के वातावरण से बाहर आ सकते हैं.”

सलमान रुश्दी जल्द ही अपनी जीवनी रिलीज़ करने वाले हैं जिसका शीर्षक है – जोसफ एंटन. इस किताब में उन्होंने बताया है कि 1989 में उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की वजह से उन्हें किस तरह से भूमिगत होना पड़ा था.

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