क्या नीतीश कुमार होंगे यूपीए के तारणहार?

नीतीश कुमार
Image caption नीतीश कुमार पहले भी अपने बयानों से सहयोगी पार्टी भाजपा को मुश्किल में डाल चुके हैं

केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद नए सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है.

क्या आने वाले समय में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल (यू) इस सूची में शामिल हो सकती है?

नीतीश कुमार के हालिया कई बयानों और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उनके बयानों से उनकी मंशा पर सवाल उठने लगे हैं.

बुधवार को बिहार में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने ये कह दिया कि जो भी पार्टी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगी, वे उसका समर्थन करेंगे.

पिछले दिनों राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी जनता दल (यू) ने अपनी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी से अलग रुख़ अपनाया था और राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था.

तो दूसरी ओर नरेंद्र मोदी को लेकर अपने बयानों से भी नीतीश कुमार भाजपा के शीर्ष नेताओं की आँखों की किरकिरी बन चुके हैं.

कितना दमदार है नीतीश का बयान

बुधवार को एक समारोह में नीतीश कुमार ने कहा, "जो भी पार्टी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगी, हम उसे केंद्र में समर्थन देंगे."

बिहार से लोकसभा के 40 सांसद आते हैं, जिनमें से 20 जनता दल (यू) के हैं. यानी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से तीन ज्यादा. तृणमूल कांग्रेस के पास 19 सांसद हैं.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने तो एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में नीतीश के बयान पर काफ़ी उत्साह दिखाया और कहा कि बिहार समेत कई राज्यों को विशेष दर्जा देने की आवश्यकता है और पार्टी इस पर विचार-विमर्श के लिए तैयार है.

लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कांग्रेस के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार किया है.

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "सूरज इधर से उधर हो सकता है, लेकिन जेडीयू, नीतीश कुमार और शरद यादव कांग्रेस के साथ नहीं जाने वाले. तालमेल तो सबके साथ हो सकता है, अभी नहीं हो सकता है एफडीआई लगाने के बाद."

लेकिन नीतीश कुमार पार्टी में अपनी अलग राय के बारे में मशहूर रहे हैं.

गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार के बारे में भी नीतीश और शरद यादव ने अलग-अलग बयान दिए थे.

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