कहाँ है 'भ्रष्टाचार' की गंगोत्री?

 बुधवार, 26 सितंबर, 2012 को 16:05 IST तक के समाचार
मुंबई विधानसभा

अजित पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार के सामने चुनौती आ गई है

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के इस्तीफा देने के बाद राज्य की राजनीति दोराहे पर खड़ी हो गई है.

अजित पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में सिंचाई परियोजनाओं पर बेतहाशा खर्च बढ़ा.

पर आखिर वो आरोप हैं क्या?

सबसे प्रमुख आरोप है कि जिस दौर में अजित पवार महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री रहे उस दौर में विदर्भ इलाक़े में कई सिंचाई परियोजनाओं की लागत ड्रामाई अंदाज़ में बढ़ा दी गई.

कुल मिलाकर विदर्भ अंचल में एक हज़ार से ज़्यादा सिंचाई परियोजनाओं पर काम होना था. इनमें से 730 पूरी हो चुकी हैं और 340 पर काम चल रहा है.

लेकिन जब से ये परियोजनाएँ शुरू हुईं तब से इनकी लागत में कुल मिलाकर 37,570 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी हो चुकी है.

बढ़ती लागतें

शरद पवार

राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने कहा है कि राज्य सरकार अस्थिर नहीं होगी

उदाहरण के लिए नागपुर के पास गोसीखुर्द सिंचाई परियोजना की मूल लागत 372 करोड़ रुपए आँकी गई थी. उस समय राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे.

लेकिन अब इसकी लागत बढ़ाकर 14,000 करोड़ रुपए कर दी गई है.

विपक्ष कहता है कि इसमें कई ठेकेदारों और नेताओं और उनके परिवार वालों के वारे न्यारे हुए हैं. और ये सब तब हुआ जब अजित पवार सिंचाई मंत्री थे.

मीडिया ने इस घोटाले पर लगातार खबरें छापी हैं. कहा गया है कि उन्हीं के कार्यकाल के दौरान अक्तूबर 2009 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले बहुत जल्दी 6,143 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई.

आरोप ये भी लगाया गया है कि नियमों और प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ करते हुए तमाम सिंचाई परियोजनाओं को छोटे स्तर के अधिकारियों की ओर से मंज़ूरी दिला दी गई.

निगम के एक आला अफसर ने इस पर ऐतराज़ जताते हुए राज्य सरकार को लिखा था कि इन ठेकों में बाज़ार भाव से काफी ज़्यादा कीमतों में माल खरीदा गया था और ये सभी फैसले छोटे स्तर के अधिकारियों ने किए.

गैरज़रूरी खर्च?

इसके अलावा ये भी कहा गया है कि बजट बढ़ाने के लिए परियोजनाओं में गैरज़रूरी काम किए गए, मसलन जहाँ दो पाइप बिछाए जाने थे वहाँ तीन पाइप बिछा दिए गए. केंद्रीय जल आयोग की इजाजत के बिना बड़े बाँध से पहले नदी की धारा में कई छोटे छोटे बाँध बना दिए गए जिनसे लागत काफी बढ़ गई.

सिंचाई घोटाले के कारण राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन के तनाव भी सामने आ गए हैं.

नागपुर से वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे ने कहा है कि राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के इशारे के बिना अजित पवार और उनके साथ 15 विधायक इस्तीफे नहीं दे सकते थे.

हालाँकि शरद पवार कह रहे हैं कि काँग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार को अस्थिर करने की उनकी कोई मंशा नहीं है लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि इस्तीफे का पूरा प्रकरण काँग्रेस के केंद्गीय नेतृत्व को दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है.

पत्रकार प्रकाश दुबे कहते हैं कि पश्चिम भारत में महाराष्ट्र के अलावा काँग्रेस कहीं सत्ता में नहीं है. अब शरद पवार सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह को संदेश देना चाहते हैं कि पूरब में ममता बनर्जी उनसे किनारा कर सकती हैं तो पश्चिम में लगाम शरद पवार के हाथ में है.

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